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मियाद पूरी पर परियोजनाएं अधूरी

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सोनभद्र। नक्सल प्रभावित जिले मेें कई विकासपरक परियोजनाओं की रफ्तार थम गई है। वजह विकास की कई परियोजनाओं की जांच चलना बताया जा रहा है। आरोप है कि परियोजना के निर्माण कार्य में अनियमितता बरती गई है। जिसमें जांच के चलते काम रुका है। वहीं एनओसी न मिलने और धन के अभाव में कई पुलों का निर्माण ठप पड़ा है। ऐसे में निर्धारित समय सीमा बीतने के बावजूद अभी तक कई पुल समेत अन्य परियोजनाएं आधी अधूरी हैं। बिहार बार्डर पर राबर्ट्सगंज तहसील क्षेत्र अन्तर्गत स्थित दरेब गांव जाने वाले संपर्क मार्ग पर नयनदह नदी पर 1.14 करोड़ की लागत से पुल का निर्माण होने की हरी झंडी मिल गई है। लोक निर्माण विभाग द्वितीय खंड द्वारा काम कराया जाना है, लेकिन लंबे समय से वन विभाग की तरफ से एनओसी न दिए जाने से पुल का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। जबकि निर्माण कार्य इसी वर्ष 31 दिसंबर तक पूरा होना है। अवर अभियंता प्रमोद चौधरी ने बताया कि पुल निर्माण की फाइल वन विभाग में अटकी हुई है। एनओसी न मिलने से पुल का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। एनओसी मिलते ही पुल का निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
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चतरा ब्लॉक में पीएचसी उच्चीकृत कर सीएचसी बनना था। निर्माण कार्य 2009 में उत्तर प्रदेश निर्माण निगम ने शुरू किया। 011 में कार्य बंद कर दिया गया। पांच वर्ष बाद मंडलायुक्त ने जांच कर रिपोर्ट तलब की और निर्माण कार्य में अनियमितता बरते जाने पर तत्कालीन अधिशासी अभियंता और ठेकेदार पर अप्रैल 2018 में मुकदमा दर्ज किया गया। उसके बाद से निर्माण कार्य बंद है। सीएचसी बनने से 60 ग्राम पंचायत के लगभग 150 राजस्व गांव के नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधा मिलती। घोरावल तहसील क्षेत्र के धुरकरी गांव में सोनभद्र-मिर्जापुर सीमा पर बकहर नदी पर नए पुल का निर्माण कार्य करीब चार वर्ष से बंद है। सपा सरकार में 217.23 लाख रुपये बजट वाले इस पुल का निर्माण कार्य समय सीमा समाप्त हो जाने के बाद भी पूरा नही हो सका। नदी पर लघु सेतु निर्माण के लिए प्रथम किश्त के रूप में 54 लाख रुपये की धनराशि शासन से जारी की गई। नए पुल का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ और पांच खंभों का निर्माण हो गया। इसी बीच 2017 में हुए चुनावों में प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो गया और पुल का निर्माण कार्य अधर में लटक गया। दुद्धी नगर पंचायत क्षेत्र में 2011 में आईएचएसडीपी योजना के तहत 445 आवासों का निर्माण कार्य शुरू कराया गया था। कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस को 31 मार्च 2014 तक इसे पूरा करना था। लेकिन निर्माण अवधि के सात वर्ष बीतने के बाद भी आवास का निर्माण पूर्ण नहीं हो सका है। डूडा अधिकारी राजेश उपाध्याय ने बताया कि 96 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है। शेष आवासों का निर्माण कार्य शीघ्र ही पूरा करा दिया जायेगा।
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