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Sonebhadra News: आरटीई दाखिले में अड़ंगा बन रहे निजी स्कूल

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सोनभद्र। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाने की कवायद एक बार फिर अड़चनों में फंसती नजर आ रही है। जिले के कई निजी स्कूल अब भी मनमानी पर उतारू हैं, जिससे आरक्षित सीटों का भरना मुश्किल होता जा रहा है।
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आरटीई के तहत जिले के 459 निजी स्कूलों में कक्षा प्री और प्रथम के लिए 4113 सीटें आरक्षित हैं। दिसंबर से मार्च तक चार चरणों में हुई लॉटरी प्रक्रिया में कुल 1503 बच्चों का चयन हुआ। इसके बावजूद अब तक सिर्फ 518 बच्चों को ही दाखिला मिल पाया है, जो कुल आरक्षित सीटों का मात्र 12.6 फीसदी है। बीएसए कार्यालय से चयनित बच्चों को दाखिले के लिए पत्र दिए जा चुके हैं, लेकिन जब अभिभावक निजी स्कूलों में पहुंचते हैं तो कुछ स्कूल दाखिले से साफ इनकार कर रहे हैं, तो कुछ चक्कर लगवाकर टालमटोल कर रहे हैं। कई स्कूल मई या फिर उसके बाद आने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
दाखिले के लिए बच्चे और अभिभावक लगातार स्कूलों व अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन निजी स्कूलों के रवैये से वे हताश हैं।
63 प्रतिशत सीटें चयन में ही रह गईं खाली
चारों चरणों में हुए चयन के दौरान ही 63 प्रतिशत से अधिक सीटें खाली रह गईं। अब जो 37 प्रतिशत सीटें बची हैं, उनमें भी दाखिला नहीं हो पा रहा है। ऐसे में संभावना है कि इस बार कुल 85 फीसदी सीटें खाली ही रह जाएंगी। बीएसए कार्यालय की ओर से जिले भर में आरटीई के तहत आवेदन के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया था, जिसके बाद चयन की प्रक्रिया हुई, लेकिन स्कूल प्रबंधन इस योजना को पूरी तरह लागू करने में रुचि नहीं दिखा रहे।
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चयनित बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया चल रही है। यदि कोई निजी स्कूल दाखिले से मना करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। —मुकुल आनंद पांडेय, बीएसए, सोनभद्र
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