सोनभद्र। अपर सत्र न्यायालय विशेष न्यायाधीश की कोर्ट ने बृहस्पतिवार को गांजा तस्करी के मामले में चार आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। पुलिस की विवेचना में चूक से आरोपी राहत पाने में सफल रहे।
कोर्ट अभिलेखों के अनुसार, 9 अप्रैल 2012 को बभनी थानाध्यक्ष मधुसूदन शुक्ला सहित पुलिस टीम ने छत्तीसगढ़ की ओर से आ रही जीप से दो क्विंटल गांजा बरामद करने का दावा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। समय-समय पर हुई गवाही में पुलिस अधिकारियों के बयानों में काफी विरोधाभास नजर आया। मामले में अधिवक्ता ज्वाला प्रसाद और धमेंद्र दुबे ने आरोपियों की ओर से पैरवी करते हुए दलीलें दी।
बृहस्पतिवार को अपर सत्र न्यायालय (विशेष न्यायाधीश) आबिद शमीम ने फैसला सुनाते हुए आरोपी घोरावल कोतवाली क्षेत्र के लक्षनधारी कोल, मुनअर खां, गीता देवी और बेचू शर्मा को दोष मुक्त करने का आदेश दिया। कोर्ट ने अपने निष्कर्ष टिप्पणी में महिला कांस्टेबल की ड्यूटी में विरोधाभास, तलाशी पर आरोपियों की रजामंदी पर हस्ताक्षर न होना शामिल किया। वादी मुकदमा ने गांजा के तौल को इलेक्ट्रानिक कांटा पर करने, जबकि हमराही ने तराजू-बटखरा से करने की बात बताई। कई अन्य पहलुओं पर भी पुलिस कोर्ट में अपनी कहानी में उलझ गई।
मादक पदार्थ की अवैध बिक्री में हुई सजा
सोनभद्र। पुलिस के ऑपरेशन कंविक्शन के तहत बृहस्पतिवार को कोर्ट ने अवैध मादक पदार्थ की बिक्री के मामले में दोषी को सात माह कैद की सजा सुनाई। अभियोजन के मुताबिक बभनी थाने में चपकी निवासी राहुल सिंह के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट का मुकदमा दर्ज था। इस पर सुनवाई करते हुए अपर सिविल जज एनडीपीएस एक्ट की कोर्ट ने उसे दोषी करार दिया। उसे सात माह का सश्रम कारावास और 04 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर 01 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।