ओबरा। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) ने 16 फरवरी को सभी बिजली उपयोगिता मुख्यालयों और परियोजनाओं पर प्रदर्शन का निर्णय लिया है। इसके माध्यम से बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्वय समिति (एनसीसीओईईई) को समर्थन दिया जाएगा।
एआईपीईएफ के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने निर्णय के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पिछले दिनों में हुई बैठक में सभी संगठनों ने मिलकर यह तय किया है। सरकार की लिखित प्रतिबद्धता के बाद भी बिजली (संशोधन) विधेयक 2022 को रद्द करने की हमारी मांगों का पालन नहीं किया गया है। इसके विपरीत बिजली की सार्वभौमिक पहुंच के अधिकारों पर अंकुश लगाने के लिए उपभोक्ताओं के परिसर में प्रीपेड स्मार्ट मीटर गैरकानूनी तरीके से लगाए जा रहे हैं। बिजली क्षेत्र के निजीकरण की दिशा में अगले कदम के रूप में ट्रांसमिशन सबस्टेशनों की स्थापना के लिए टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली निर्धारित की गई है।
विद्युत मंत्रालय भारत सरकार विद्युत (संशोधन) नियमों के माध्यम से विद्युत (संशोधन) विधेयक 2022 के अपने निजीकरण के एजेंडे को जारी रखे हुए है। कहा कि लोगों के विरोध और प्रतिरोध संघर्ष के सभी लोकतांत्रिक रूपों को पूरी तरह से नकारते हुए सरकार एनएमपीएल के नाम पर राष्ट्रीय संपत्तियों को निजी हाथों में बेचने के लिए आगे बढ़ रही है। इससे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में गहरा संकट पैदा हो जाएगा और लोगों के लिए तत्काल और आने वाले दिनों में और अधिक कठिनाई होगी। इसके विरोध में वृहद पैमाने पर आंदोलन होगा।