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Sonebhadra News: कोर्ट में पुलिस साबित नहीं कर सकी मुठभेड़, आरोपी बरी

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सोनभद्र। जिले में करीब 15 साल पहले हुई कथित मुठभेड़ को अदालत में सही साबित करने में पुलिस नाकाम रही है। सुनवाई के दौरान पुलिस की दलीलों को खारिज करते हुए कोर्ट ने चाराें आरोपियों को बरी कर दिया।
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रॉबर्ट्सगंज निवासी उमाशंकर जायसवाल ने आरोप लगाया था कि 19 जनवरी 2010 को वह परिवार के साथ वाराणसी गए थे। इसी दौरान रात में चोरों ने आलमारी तोड़कर लाखों के गहने नकदी उड़ा दिए।
पुलिस ने अज्ञात चोरों पर केस दर्ज किया था। इस मामले में तत्कालीन कोतवाल शफीक अहमद खां के नेतृत्व में पुलिस टीम ने हिंदुआरी में बेलन नदी के किनारे से मुठभेड़ में चोर गिरोह को दबोचने का दावा किया था।
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इसमें तपन कुमार उर्फ सैमोल मुखर्जी के पास से तमंचा बरामद हुआ, जबकि राजेश सोनी और राजकुमार उर्फ छोटू उर्फ हुंडू के जेब से गहने बरामद होना बताा गया था। पुलिस ने जानलेवा हमले, आर्म्स एक्ट सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया। महेश पाटिल को भी आरोपी बनाया गया था। करीब पंद्रह साल पुराने मामले में अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम जीतेंद्र कुमार द्विवेदी की कोर्ट ने फैसला सुनाया है।
सुनवाई के दौरान अदालत में पुलिस मुठभेड़ के आरोपों को साबित करने में नाकाम साबित हुई। बरामद तमंचे के क्रियाशील होने को भी पुलिस साबित नहीं कर सकी। विवेचक की ओर से बरामद कट्टा और कारतूस का परीक्षण प्रयोगशाला में नहीं कराया गया, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो सका कि कट्टा चालू हालत में था या फिर नहीं।
पुलिस ने जिस स्थान पर मुठभेड़ का दावा किया था, जहां से कुछ कदम की दूरी पर ही दुकानें थी, बावजूद किसी स्वतंत्र साक्षी के हस्ताक्षर फर्द पर नहीं थे। दिन में 11 बजे मुख्य तिराहे पर फायरिंग की आवाज किसी व्यक्ति के न सुने जाने पर अदालत ने हैरानी जताते हुए पुलिस की विवेचना और कार्रवाई पर सवाल उठाते। इसका लाभ देते हुए अदालत में सभी चार आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
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