ढाई वर्ष पूर्व किशोरी (13) को भगाने के मामले में दोषी को अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ने 20 साल की कैद और 65 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी पड़ेगी। अर्थदंड की धनराशि 65 हजार रुपये पीड़िता को मिलेगी।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक सदर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसकी बेटी 21 अक्तूबर 2019 को परीक्षा देने गई थी लेकिन घर नहीं लौटी। नात रिश्तेदारों के साथ ही हर संभावित जगहों पर बेटी की तलाश की गई तो पता चला कि राजेश पासवान बेटी को बहला फुसलाकर कहीं भगा ले गया है। 23 अक्तूबर 2019 को पुलिस ने अपहरण एवं पॉक्सो एक्ट में एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू की। 27 अक्तूबर को पुलिस ने किशोरी को बरामद कर लिया। विवेचक ने पर्याप्त सबूत मिलने पर राजेश पासवान के विरुद्ध न्यायालय में चार्जशीट दाखिल किया। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषी राजेश पासवान को 20 वर्ष की कैद और 65 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित होगी। वहीं अर्थदंड की समूची धनराशि 65 हजार रुपये पीड़िता को मिलेगी। अभियोजन पक्ष की तरफ से सरकारी वकील दिनेश अग्रहरि, सत्य प्रकाश त्रिपाठी एवं नीरज कुमार सिंह एडवोकेट ने बहस की।