राबर्ट्सगंज पूरब मोहाल में मंगलवार को रोजा में इबादत करता रोशन खान का परिवार।
तपिश पर आस्था भारी रही। भीषण गर्मी के बाद भी मुसलमानों ने जोशो खरोश के साथ पहला रोजा रखा। युवा और बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्गों में गजब का उत्साह रहा। रमजान के पहले दिन ही नगर की मस्जिदें नमाजियों से गुलजार रहीं। शाम को अजान होते ही लोगों ने बारगाहे इलाही में दुआओं के लिए हाथ उठा दिए और फिर खजूर और पानी से रोजा खोला। वहीं इशा की नमाज में तरावीह अदा की गई।
भोर में उठकर लोगों ने सहरी कर रोजा रखने की नीयत की। दिन बढ़ा तो तपिश अपना रंग दिखाने लगी। लेकिन आस्था उस पर भारी पड़ी। रोजेदार तिलावत और इबादत में मशगूल रहे। पहले रोजे में ही बच्चों से लेकर बड़ों तक ने सब्र के इस इम्तहान को बखूबी पास किया। रोजे के पहले दिन मंगलवार को मस्जिदें नमाजियों से गुलजार रहीं। लोगों ने अल्लाह की बारगाह में दुआ के लिए हाथ उठाए। मगरिब की अजान होते ही लोगों ने खजूर और पानी से इफ्तार कर खुदा का शुक्रिया अदा किया। इससे पूर्व बाजारों में लोगों ने इफ्तार के सामान खरीदे। फलों और किराने की दूकानों पर लोगों की भीड़ रही। वहीं महिलाओं ने इफ्तारी के लिए दोपहर बाद से ही तैयारी शुरू कर दी थी।
रोजेदार नाजनीन का कहना था कि तपिश लगने से बार-बार प्यास का एहसास हो रहा था। जीशान का कहना था कि सुबह और शाम तो काफी राहत रही लेकिन दिन में गर्मी और उमस ने थोड़ा परेशान जरूर किया। यासमीन और जुलेखा का कहना था कि कई साल बाद इतनी भीषण गर्मी में पाक रमजान का महीना आया है। ख्ुादा ने यह इम्तिहान की घड़ी सबके सामने रखी है। इस इम्तिहान में वहीं सफल होगा जो अपना फर्ज अदा करेगा।