बच्चों को डिप्थीरिया से बचाने के लिए चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान में अभिभावक रुचि नहीं ले रहे। कई जगह स्कूलों से भी सहयोग नहीं मिल रहा। छह दिनों तक चलने वाले अभियान में से अब तक दो दिन में सात हजार बच्चों का टीकाकरण हो पाया है। पूरे जिले में करीब 40 हजार बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और अफवाहों के चलते लोग बच्चों को टीका लगवाने से कतरा रहे हैं। हाल यह है कि अब खुद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को मैदान में उतरना पड़ा है। स्कूलों व बस्तियों में जाकर लोगों से संपर्क कर उन्हें टीकाकरण के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
हाल ही में डिप्थीरिया के मामले तेजी से बढ़े हैं। बीमारी की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने 5, 10 और 15 वर्ष की आयु के बच्चों व किशोरों को टीका लगवाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए आशा, एएनएम को लगाया गया है। शिक्षा विभाग की ओर से भी इसमें सहयोग के लिए शिक्षकों को निर्देश जारी किए गए हैं। पहले चरण में टीकाकरण के लिए जिले के तीन ब्लॉकों का चयन किया गया है। म्योरपुर ब्लॉक में 15,418 बच्चों को टीका लगाया जाना है। घोरावल में भी करीब इतने ही बच्चे हैं, जबकि दस हजार संख्या चोपन ब्लॉक में चिह्नित है। पहले दो दिन के सत्र 26-27 सितंबर में तीनों ब्लॉकों में 7261 बच्चों को ही टीका लगाया जा सका है। टीकाकरण की धीमी गति के पीछे जागरूकता के अभाव को कारण बताया जा रहा है।
सबसे ज्यादा दिक्कत म्योरपुर ब्लॉक में आ रही है। आदिवासी बहुल इस ब्लॉक के कई गांवों में अभिभावक टीका कराने को तैयार नहीं हो रहे। उनकी सहमति न मिलने के कारण शिक्षक भी स्कूलों में टीका लगवाने को राजी नहीं हो रहे। इसके चलते डिप्थीरिया पर नियंत्रण का अभियान प्रभावित हो रहा है। खंड शिक्षा अधिकारी म्योरपुर विश्वजीत ने बताया कि सभी विद्यालयों को लिखित निर्देश दिया गया है कि वह डिप्थीरिया का टीकाकरण कराएं। अगर कोई इसमें सहयोग नहीं करता तो जानकारी लेकर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
क्या है डिप्थीरिया
डिप्थीरिया एक गंभीर जीवाणु संक्रमण है, जो आमतौर पर नाक और गले की श्लेष्म झिल्ली को प्रभावित करता है। गंभीर अवस्था में डिप्थीरिया हृदय, गुर्दे और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे गले में सूजन, खराश, आवाज दबना, सांस लेने में कठिनाई, नाक से स्राव, बुखार और ठंड लगना, थकान महसूस होती है।26, 27, 30 सितंबर और 1, 3 व चार अक्तूबर तक पांच वर्ष के बच्चाें को डीपीटी बूस्टर-2 डोज, 10 वर्ष के बच्चों को टीडी-10 और 16 वर्ष के बच्चों को टीडी-16 का टीका लगना है।
कई विद्यालयों में डिप्थीरिया का टीका लगवाने में अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा। इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई है। संबंधित स्कूलों व अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें टीके के फायदे बताते हुए प्रेरित किया जा रहा है। -डॉ. पीएन सिंह, अधीक्षक, सीएचसी म्योरपुर।
टीकाकरण अभियान सुचारू चल रहा है। जागरूकता की कमी से कुछ इलाकों में दिक्कत आ रही है। वहां डॉक्टरों को भेजकर लोगों का भ्रम दूर करते हुए टीकाकरण कराया जा रहा है। -डॉ. गिरधारी लाल, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी।