दिल की बीमारी अब तेजी से बढ़ती जा रही है। पहले हार्ट अटैक के ज्यादातर मामले अधिक उम्र वालों में होते थे, मगर अब 35-40 आयु वर्ग वाले भी इसके शिकार हो रहे हैं। डॉक्टर इसे अनियमित दिनचर्या, फास्ट फूड का अत्यधिक उपयोग और आरामतलबी को कारण बता रहे हैं। उनका कहना है कि अगर खानपान में सावधानी नहीं बरती गई तो दिल की बीमारी किसी भी आयु वर्ग के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
पिछले तीन महीने में ही जिले में हार्ट अटैक से 12 से अधिक मौतें हुई हैं। हर महीने अमूमन चार-पांच लोगों की जान इस बीमारी से जा रही है। कई बार काम करते-करते अचानक से लोग गिर जा रहे हैं और फिर दम तोड़ दे रहे हैं। उन्हें अस्पताल ले जाने का भी मौका नहीं मिलता। सीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार का कहना है कि लोगों का रहन-सहन का तरीका काफी बदला है। सुविधाभोगी होने के चलते लोग शारीरिक श्रम कम कर रहे हैं। खानपान की शैली बदली है। फास्ट फूड और बाजार में मिल रहे तले-भूने सामानों का अत्यधिक सेवन शरीर को बीमार कर रहा है। इन खाद्य पदार्थों में होने वाला बैड फैट धमनियों में जाकर नुकसान पहुंचा रहा है, जिससे हार्ट अटैक के मामले आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि हृदय को स्वस्थ रखने के लिए सबसे जरूरी संयमित दिनचर्या है। अंकुरित अनाज, सलाद, अमरुद, पपीता जैसे फल, दूध-दही का सेवन करें। रोजाना व्यायाम, मेडिटेशन भी जरूरी है। पूरी नींद लें और तनाव से दूर रहें। कहा कि जिले के अस्पतालों में ईसीजी जांच की सुविधा है। हेल्थ एटीएम से ब्लड प्रेशर, लिपिड प्रोफाइल, कोलेस्ट्राल आदि की जांच की जाती है। इससे कुछ हद तक शरीर की स्थिति जानने में मदद मिलती है। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. एसएस पांडेय बताते हैं कि हार्ट के मरीजों में अब हर उम्र के लोग शामिल हैं। ओपीडी में हर रोज तीन-चार मामले आते हैं। ईसीजी व ब्लड जांच के आधार पर उन्हें दवा और परामर्श दिया जाता है।
केस एक::
एआरटीओ कार्यालय में पिछले साल कंप्यूटर पर काम करते समय डीवीआर बाबू अचानक कुर्सी से गिर पड़े। आनन-फानन सहकर्मी उन्हें अस्पताल ले आए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। उनकी उम्र महज 35 वर्ष थी। मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया।
केस दो::
करीब चार माह पहले रॉबर्ट्सगंज मंडी समिति के समीप युवा व्यापारी की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। वह अपनी दुकान पर मौजूद थे। ग्राहक को सामान देने के लिए उठे। अचानक सीने में तेज दर्द हुआ और वहीं गश खाकर गिर पड़े। कुछ देर बाद ही मौत हो गई।
दिल के मरीजों के उपचार की नहीं सुविधा
औद्योगिक जिले में हार्ट के मरीजों के उपचार की कोई सुविधा नहीं है। यहां के किसी भी अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है। मरीजों का प्रारंभिक उपचार सिर्फ फिजिशियन के ही भरोसे होता हैं। इसके बाद उन्हें वाराणसी रेफर कर दिया जाता है। वाराणसी से रॉबर्ट्सगंज जिला मुख्यालय की दूरी करीब सौ किमी है। वहां तक जाने से पहले ही मरीज रास्ते में दम तोड़ देते हैं।