मौजूदा समय में चुनाव के दौरान मैदान में ताल ठोंक रहे दो उम्मीदवार एक-दूसरे को नीचा दिखाने और नुकसान पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते, मगर पहले नेताओं में ऐसा भाव नहीं था। चुनाव में विचारधाराओं की लड़ाई होती थी। उनकी सोच भले ही अलग-अलग रही हो, लेकिन आपस में कटुता नहीं थी। तभी तो प्रचार के दौरान आमना-सामना होने पर वह न सिर्फ प्रेम से मिलते बल्कि हर संभव मदद भी करते थे। चुनाव से जुड़ा ऐसा ही एक किस्सा है वर्ष 1977 के लोकसभा चुनाव के दौरान का।
यह वह दौर था जब देश में इमरजेंसी के बाद चुनाव हो रहा था। उस किस्से को याद करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार और शिक्षक भोलानाथ मिश्र बताते हैं कि शिवसंपत राम भारतीय लोकदल के उम्मीदवार थे, जबकि राम स्वरूप कांग्रेस के उम्मीदवार थे। पं. कमला पति त्रिपाठी कांग्रेस प्रत्याशी का प्रचार करने राबर्ट्सगंज की ओर आ रहे थे। तब राबर्ट्सगंज अविभाजित मिर्जापुर का हिस्सा था। शिवसंपत राम चुनाव प्रचार के बाद अहरौरा की तरफ से लौट रहे थे। अहरौरा घाटी के समीप उनकी गाड़ी अचानक खराब हो गई। शिवसंपत राम मायूस होकर अपने समर्थकों के आने की बाट जोह रहे थे। संयोग से उसी दौरान पं. कमलापति त्रिपाठी वहां पहुंच गए। उनकी नजर भारतीय लोक दल का झंडा लगे वाहन पड़ी तो उत्सुकता में वहीं रुक गए। शिवसंपत राम को देखकर उनकी परेशानी पूछी। जब वाहन खराब होने की जानकारी हुई तो उन्होंने काफिले के एक वाहन से कांग्रेस का झंडा उतरवाया और शिवसंपत राम को सौंप दिया। कहा कि आप गाड़ी लेकर जाइए। राबर्ट्सगंज पहुंचने के बाद कोई मिस्त्री भेज दीजिएगा, वह वाहन मरम्मत कर ले जाएगा। इस चुनाव में शिवसंपत राम 235164 वोट पाकर एकतरफा जीते थे जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को महज 72120 वोट मिले थे।