केंद्र सरकार की ओर से वृहस्पतिवार को लोकसभा में कोयला उद्योग के विनिवेश का बिल पेश किए जाने के बाद कोल कंपनी में विरोध शुरू हो गया है।
बड़ा मामला यह है कि विरोध में भाजपा का अनुषंगी संगठन कहा जाने वाला भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) भी उतर गया है।
वृहस्पतिवार को एनसीएल परियोजनाओं में विनिवेश बिल में काला फीता बांध मजदूरों ने विरोध प्रदर्शन किया। कहा कि कोल उद्योग के किसी भी तरह से निजीकरण की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वक्ताओं का कहना था कि कोल इंडिया के शेयरों को बेचकर निजीकरण की योजना बनाई जा रही है, जिसे किसी भी हाल में सफल नहीं होने दिया जाएगा। बीना में शाखा सचिव मनोज सिंह ने प्रदर्शन की अगुवाई की।
इस मौके पर सीपी सिंह, प्रेमलाल पटेल, जीके पांडेय, सुशील कुमार, श्यामधर, बीपी सिंह, वीरेंद्र आर्य आदि मौजूद रहे। वहीं एनसीएल की खड़िया कोयला परियोजना में बीएमएस से जुड़े मजदूरों ने सरकार के फैसले का विरोध काला फीता बांध कर किया।
कहा कि बिल वापस नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। बीएमएस (भारतीय मजदूर संघ) से संबंद्ध भारतीय कोयला खदान मजदूर संघ के अध्यक्ष बेचूलाल और महामंत्री एनके सिंह ने इसकी अगुवाई की।
खड़िया में सचिव आेंकार नाथ सिंह यादव, कृष्णशीला में डीडी सिंह, ककरी में राजेश कुमार सिंह की अगुवाई में श्रमिकों ने विरोध प्रदर्शन किया।
एनसीएल की अमलोरी कोयला परियोजना में प्रदर्शन कर रहे श्रमिक नेताओं का कहना था कि नए बिल के तहत निजी कंपनियों को दिए जाने वाले कोल ब्लाकों से निकाले गए कोयले को खुले बाजार में बेचने का अधिकार मिल जाएगा।
बताते चलें कि अब तक यह अधिकार कोल इंडिया के पास सुरक्षित है। नेताओं का कहना है कि कोल इंडिया में शेयर भी बेचने का प्रस्ताव किया गया है। इसी बात का विरोध किया जा रहा है।
अमलोरी में हुए प्रदर्शन में कई नेता शामिल रहे। इसी तरह जयंत, ब्लाक बी, झिंगुरदा और दुद्धीचुआ, केंद्रीय कार्यशाला जयंत में भी कामगारों ने काला फीता बांध कर विरोध दर्ज कराया।