एनआईए अफसर तंजील अहमद और उनकी पत्नी के हत्यारे मुनीर की रातें करवटें बदलते बीत रही हैं। कोर्ट से फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद से वह बेचैन है। हालांकि उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं है। जिला जेल की तन्हाई बैरक में रखे गए मुनीर की हर गतिविधि पर सुरक्षाकर्मी पैनी निगाह रखे हुए हैं।
दो अप्रैल 2016 की रात एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना पर एक विवाह समारोह से लौटते समय दिल्ली में हमला हुआ था, जिसमें तंजील अहमद की मौत हो गई थी। उपचार के दौरान पत्नी ने भी दम तोड़ दिया। दोहरे हत्याकांड में बिजनौर के सहसपुर निवासी शातिर अपराधी मुनीर और रैयान को 21 मई को बिजनौर के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने फांसी की सजा सुनाई है। सजा के बाद रैयान को बिजनौर जेल में ही रखा गया है जबकि मुनीर को शनिवार की देर रात सोनभद्र जेल लाया गया। उसे यहां कड़ी सुरक्षा के बीच तन्हाई बैरक में रखा गया है। जेल में दाखिल होने के बाद से ही उसकी हर गतिविधि पर निगाह रखी जा रही है। फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद मुनीर अंदर से बेचैन है लेकिन उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं है। पिछली दोनों रातें उसकी करवटें बदलते बीती हैं। दिन में भी वह बैरक में एक छोर से दूसरे छोर पर टहलते हुए बिता रहा है। कोने में बैठकर अकेले ही कुछ बुदबुदाता रह रहा है। जिला जेल गुरमा के अधीक्षक जगदंबा दुबे के मुुताबिक मुनीर शातिर अपराधी है। उसकी सुरक्षा में कोई चूक न हो, इसके लिए हर गतिविधि पर निगाह रखी जा रही है। बैरक के आसपास कड़ी सुरक्षा लगाई गई है।