सोनभद्र/डाला। शक्ति आराधना का महापर्व वासंतिक (चैत्र) नवरात्र रविवार से शुरू हो गया। पहले दिन मातारानी के शैलपुत्री स्वरूप की भक्तों ने पूजन अर्चन किया। पुलिस प्रशासन के अनुसार, जिले के प्रमुख देवी मंदिरों में एक लाख से अधिक भक्तों ने दर्शन पूजन किया। घरों में सुबह कलश स्थापना के साथ अनुष्ठान शुरू हुआ।
रॉबर्ट्सगंज नगर स्थित प्राचीन शीतला मंदिर के कपाट सुबह मंगला आरती के बाद खुले। इसके बाद से भक्तों का तांता लग गया। मंदिर परिसर में स्थापित अन्य देवी-देवताओं का भी भक्तों ने पूजन किया। मंदिर के पीछे स्थित नीम के पेड़ के नीचे भी लोगों ने पूजन किया। आसपास दुकानों पर जमकर खरीदारी हुई। साई चौक स्थित दुर्गा मंदिर, पूरब मेाहाल स्थित सातो मइया शीतला मंदिर, दंडइत बाबा मंदिर परिसर स्थित दक्षिणेश्वर काली मंदिर में दर्शन पूजन के लिए भक्तों की भीड़ जुटी रही। अंबेडकर नगर स्थित कड़े माता शीतला का भी भक्तों ने दर्शन पूजन किया। डाला के बारी स्थित वैष्णो शक्ति पीठ धाम में त्रिदेवियों का पूजन किया गया। साढ़े पांच बजे भव्य आरती की गई। पुजारी श्रीकांत तिवारी ने बताया कि पहले दिन मां शैल पुत्री का पूजन कर गाय का घी अर्पित करने से रोगों से मुक्ति मिलती है। मंदिर समिति के सचिव राहुल गोयल ने बताया कि सुरक्षा के लिए निजी सुरक्षा कर्मी लगाए गए हैं। मेन गेट पर मेटल डिटेक्टर से तलाशी ली जा रही है। मंदिर की सुरक्षा में डाला चौकी प्रभारी आशीष कुमार पटेल, पांच महिला पुलिस व दस पुलिसकर्मी, दो यातायात सिपाही तैनात किए गए हैं। इसके अलावा चोपन के कुंडवासिनी मंरि और कोन के अमिला धाम में भी भक्तों की भीड़ रही।
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इस तरह मां वैष्णो देवी मंदिर का हुआ निर्माण
मंदिर समिति के लोगों के मुताबिक, स्टोन क्रशर व्यवसायी मदनलाल गर्ग थे। वह रोज प्रतिष्ठान से दोपहर को घर के लिए निकलते थे। एक अप्रैल 2002 को दोपहर में 2.15 बजे मंदिर वाले स्थान के सामने से गुजरते समय उनकी चार पहिया गाड़ी की ट्रक से जोरदार टक्कर हो गई। मगर उनकी जान बच गई। इस पर उन्हें यहां चमत्कारी देवी शक्ति का एहसास हुआ और उनके मन मन यहां मंदिर बनवाने का विचार आया। इसे उन्होंने अग्रवाल समाज के सामने रखा। 16 अप्रैल 2002 को मीटिंग में उनके प्रस्ताव को स्वीकार किया गया और 22 मई 2002 को भूमि पूजन किया। अग्रवाल समाज के सहयोग से 20 अक्तूबर 2004 को निर्माण कार्य पूरा हुआ। प्राण प्रतिष्ठा के लिए मां वैष्णो देवी धाम कटरा स्थित जम्मू से माता के रूप में ज्योति लाई गई जो आज भी प्रज्ज्वलित है। प्राण प्रतिष्ठा के दौरान ज्योति की स्थापना के समय दोपहर में अचानक मौसम बदला और बारिश होने लगी। बारिश की बौछारें गर्भ गृह तक पहुंची। इसके बाद शांत हो गईं।
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इस तरह पहुंचें मां के धाम
वाराणसी शक्तिनगर मुख्य मार्ग पर मां वैष्णो देवी का धाम है, जो चोपन से पांच किलोमीटर, डाला से तीन किलोमीटर, ओबरा से छह किलोमीटर और राबर्ट्सगंज से लगभग 30 किमी दूर है। मां के दरबार में श्रद्धालु बस, कार, ऑटो आदि से पहुंच सकते हैं। दूरदराज और दूसरे प्रांत के श्रद्धालु ट्रेन से आकर रेलवे स्टेशन चोपन, बिल्ली जंक्शन और ओबरा में उतरकर जीप, कार, और टेंपो से मां के धाम पहुंच सकते हैं।
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151 कन्याओं ने निकाली कलया यात्रा
सलखन। क्षेत्र के चूड़ीहर मंदिर में नवरात्र के पहले दिन 151 कन्याओं ने तीन किमी दूर बेलछ घाघर नदी से जल भरकर कलश यात्रा निकाली। सलखन चुड़ीहर मंदिर के प्रागंण में परिक्रमा कर जलाभिषेक किया। इस दौरान प्राचीन मंदिर के अध्यक्ष प्रह्लाद सिंह गोंड, भाजपा चोपन मंडल अध्यक्ष संजय केशरी, रामकेश्वर सिंह, विद्या दुबे, भोला जायसवाल आदि उपस्थित रहे।
पहले दिन तीस हजार भक्तों ने किए दर्शन
शक्तिनगर। शक्तिपीठ मां ज्वालामुखी मंदिर पर चैत्र नवरात्र वर्ष प्रतिपदा प्रथम तिथि रविवार को करीब 30 हजार भक्तों ने दर्शन पूजन किया। मंदिर परिसर में अनुष्ठान भी शुरू हो गया। चार बजे भोर मंगला आरती के बाद मंदिर के कपाट खोल दिए गए। मंदिर के प्राचीन द्वार एवं सामने के द्वार से भक्तों की लंबी कतारें लग गईं। मंदिर प्रांगण में घटस्थापना, दुर्गा सप्तशती पाठ, श्री सत्यनारायण पूजन, मुंडन एवं धार्मिक अनुष्ठान शुरू हुआ। यह नवरात्र तक चलता रहेगा। तीर्थ पुरोहित पंडित वेदांती प्रसाद मिश्र ने बताया कि माता जी का आगमन हाथी पर हुआ है। यह शुभ और फलदायी है। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर शक्तिनगर प्रभारी निरीक्षक कुमुद शेखर सिंह पुलिस एवं पीएसी बल के साथ रहे। मंदिर के प्राकृतिक पुजारी हेमंत मिश्र ने बताया कि रविवार को करीब 30 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन पूजन किया।
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दुद्धी में निकाली गई शोभायात्रा
दुद्धी। नगर स्थित श्री पंचदेव मंदिर में नवरात्र के पहले दिन रविवार को श्रीमद्भावगत कथा शुरू हुई। इसके पूर्व नगर में कलश शोभायात्रा यात्रा निकाली गई। इसमें मुख्य यजमान अरविंद सोनी अपनी पत्नी के साथ रहे। नगर स्थित श्री पंचदेव मंदिर से निकलकर कलश यात्रा शिवाजी तालाब पहुंची। यहां से जलभरकर दुद्धी नगर स्थित मां काली मंदिर व श्रीसंकट मोचन मंदिर होते हुए मंदिर पहुंची। यहां कलश स्थापित की गई। कथावाचक ओमकृष्ण दास जी महाराज ने बताया कि कथा का आयोजन रामनवमी तक होना है। इस दौरान आयोजन समिति के संयोजक प्रेमनारायण सिंह, मोनू, आलोक सोनी आदि मौजूद रहे। संवाद