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मोदी मैजिक पड़ा भारी, दूर कर दी नाराजगी सारी

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चुनाव से पहले जिले के सभी विधायकों के प्रति जनता में जबरदस्त नाराजगी थी। कोई विधायक के फोन न उठाने से नाराज था तो किसी के मन में यह पीड़ा थी कि विधायक ने कभी क्षेत्र में दर्शन भी नहीं दिए। हर कोई इस बार सबक सिखाने का मन बनाए हुए था। जनता का मूड भांपते हुए ही राबर्ट्सगंज से विधायक भूपेश चौबे को सार्वजनिक रूप से मंच पर कान पकड़कर उठक-बैठक तक करना पड़ गया था। जनता की नाराजगी बरकरार थी और भाजपा के प्रत्याशी मुख्य लड़ाई से बाहर नजर आ रहे थे लेकिन दो मार्च को पीएम मोदी की सभा के बाद ऐसा जादू चला कि न सिर्फ जनता विधायकों से नाराजगी भूल गई बल्कि उन्हें दोबारा जीताने के लिए खूब वोट भी किया। हालांकि इस बार सभी क्षेत्रों में जीत का अंतर काफी कम था।
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वर्ष 2017 में जिले की चारों सीट भाजपा-अपना दल-एस गठबंधन के खाते में गई थी। तब प्रचंड मोदी लहर में घोरावल में 57 हजार तो ओबरा में 44 और राबर्ट्सगंज में 40 हजार वोटों के अंतर से भाजपा प्रत्याशी जीते थे। दुद्धी में अपना दल-एस प्रत्याशी को महज 1085 वोटों के अंतर से जीत मिली थी। जनता के भरपूर समर्थन और केंद्र व प्रदेश में डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद विधायकों का कामकाज जनता की उम्मीदों के अनुकूल नहीं रहा। अपने कार्यकर्ताओं से संवाद बनाने में भी वह दूर रहे। यही कारण रहा कि जनता में उनके प्रति गहरी नाराजगी थी। चुनाव में यह नाराजगी कई क्षेत्रों में मुखर भी दिखी। इसी माहौल के आधार पर सपा ने जातीय समीकरणों की गोलबंदी करते हुए अपनी जीत के लिए पासे फेंके। छठवें चरण के मतदान से पहले तक उनकी रणनीति कामयाब भी होती दिखी लेकिन दो मार्च को पीएम मोदी के आगमन के बाद जनता पर ऐसा असर हुआ कि विपक्ष के सारे समीकरण फेल हो गए। विधायकों से नाराजगी को भुलाकर जनता ने पीएम मोदी और सीएम योगी के काम पर मुहर लगाते हुए दोबारा भाजपा को जिताने में रुचि दिखाई। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर पीएम मोदी की सभा जिले में नहीं होती तो परिणाम बदल भी सकते थे।
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