विधानसभा चुनाव में महिलाओं से जुड़े मुद्दे खूब उठाए गए। महिला सुरक्षा और शिक्षा की बातें भी हुईं। मतदान में भी महिलाएं ही आगे रहीं लेकिन प्रतिनिधित्व के लिए जनता ने महिलाओं को नकार दिया है। जिले की चार सीटों पर कुल पांच महिलाओं ने उम्मीदवारी की थी। किसी भी सीट पर महिला उम्मीदवार की जमानत नहीं बच पाई। सिर्फ घोरावल में ही कांग्रेस प्रत्याशी विंधेश्वरी सिंह राठौर को सम्मानजनक वोट मिल सके।
आदिवासी बहुल जिले के मतदाताओं ने विधानसभा के लिए अब तक 18 बार वोट किया है। आजादी के बाद से हुए चुनावों में सिर्फ एक बार ही किसी महिला को विधानसभा पहुंचने का मौका मिला है। वर्ष 2012 के चुनाव में दुद्धी सीट पर रूबी प्रसाद ने जीत दर्ज की थी। उन्हें भी किसी दल ने टिकट नहीं दिया था। वह निर्दल उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरी थीं। इसके अलावा किसी भी चुनाव में महिला प्रत्याशी जीत के करीब भी नहीं पहुंच सकी। इस बार चुनाव में सभी दलों ने महिलाओं के हित का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था लेकिन सिर्फ कांग्रेस ने ही दो सीटों पर महिलाओं को मौका दिया। घोरावल से विंधेश्वरी सिंह राठौर और दुद्धी से बसंती पनिका को कांग्रेस ने प्रत्याशी बनाया था। इनके अलावा जन अधिकार पार्टी से राबर्ट्सगंज में किरन देवी और घोरावल में रानी सिंह मैदान में थीं। आम आदमी पार्टी ने दुद्धी में पुष्पा देवी को प्रत्याशी बनाया था। इन प्रत्याशियों ने महिलाओं से सीधे जुड़ने की कोशिश की। महिलाओं ने बढ़-चढ़कर मतदान भी किया मगर महिला प्रतिनिधि को चुनने में उन्होंने रुचि नहीं दिखाई।