पांच दिसंबर 2012 को अपराह्न तीन बजे बेटी सुनीता को मारपीट कर आग लगा कर जला दिया। उसे राबर्ट्सगंज अस्पताल लाया गया, जहां से वाराणसी रेफर कर दिया गया। वहां उपचार के दौरान नौ दिसंबर को उसकी मौत हो गई। इस तहरीर के आधार पर सास, ससुर समेत पांच लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना की गई। मामले की विवेचना के दौरान पर्याप्त सबूत मिलने पर विवेचक ने न्यायालय में सिर्फ ससुर शिवकुमार व सास फूलमती उर्फ सुकुवरिया के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल किया था।
मामले की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश खलीकुज्ज्मा की अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान व पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषी ससुर शिवकुमार व सास फूलमती उर्फ सुकुवरिया को उम्रकैद व 26- 26 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर 6-6 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता कुंवर वीर प्रताप सिंह ने बहस की।