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Sonebhadra News: 2007 में मुस्लिम समाज के लोगों को दिए पट्टे, मंजूरी के बाद 67 पत्रावलियां गायब

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सोनभद्र। नगवां ब्लॉक के पनौरा ग्राम पंचायत में मनमाने ढंग से पट्टा देकर बाहर के मुस्लिम समाज के लाेगों को बसाने और रिश्तेदारी के संबंध के जरिये आदिवासियों की जमीन पर कब्जा करने की शिकायत की जांच में कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। गांव में 1985-86 से ही पट्टा आवंटन की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन 2007 में बड़े पैमाने पर मुस्लिम समाज के लोगों को पट्टे आवंटित किए गए। इसके तहत 67 पत्रावलियां स्वीकृत कराने के बाद गायब कर दी गईं। जांच टीम भी इस तथ्य से हैरान है। यहां आदिवासी महिलाओं के जरिये भी जमीन हथियाने के कुछ मामले सामने आए हैं।
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बिहार सीमा से सटे पनौरा गांव में पट्टों में बड़े स्तर पर गड़बड़ी का आरोप लगा है। दुद्धी तहसील के बघाड़ू में हुई गड़बड़ियों की जांच में पनौरा का भी मामला सामने आने के बाद शासन स्तर से जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। डीएम बीएन सिंह के निर्देश पर एसडीएम सदर उत्कर्ष द्विवेदी ने नायब तहसीलदार विजयगढ़ की अगुवाई में टीम गठित की है। 22 मार्च को भाजपा जिलाध्यक्ष नंदलाल गुप्ता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर मुस्लिम समाज को दिए गए 67 पट्टों की सूची सौंपी थी। दावा किया कि तत्कालीन प्रधान ने अपने समुदाय के लोगों को गलत तरीके से यह पट्टा दिलवाया है। मामले की गहनता से जांच कराते हुए कार्रवाई की मांग की। इस पर भी मुख्यमंत्री के यहां से मामले की जल्द जांच पूरी करते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।



पट्टे पर उठे थे सवाल, फिर जांच के आदेश पर गायब हुईं पत्रावलियां
टीम ने पहले मामले की तहसील स्तर पर पड़ताल की तो पता चला कि दो जून 2007 को हुए पट्टे के अमलदरामद के बाद उसकी फाइल कहां गई, यह किसी को नहीं पता। इसका विवरण किसी रजिस्टर में भी दर्ज नहीं मिला। टीम जब पनौरा पहुंची तो वहां भी पट्टे की स्थिति संदिग्ध दिखी। यह भी पता चला कि बिहार-झारखंड के लोगों को भी यहां पट्टा दिया गया है। तत्कालीन लेखपाल जाकिर हुसैन के बारे में बताया गया कि वह झारखंड चले गए हैं। जब टीम ने लेखपाल से संपर्क साधा तो पता चला कि तत्कालीन समय में ही पट्टे पर सवाल उठाए गए थे। पत्रावली तत्कालीन तहसीलदार के यहां जांच के लिए पहुंची, इसके बाद कहां गई, यह किसी को नहीं मालूम। तहसीलदार को पत्रावली कब जांच के लिए दी गई, इसका भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। अलबत्ता अब तक की जांच में जो जानकारी सामने आई है, उसमें यह पता चला कि इस पूरे खेल में साढ़ू के संबंधों के जरिये जमकर गड़बड़ी बरती गई है। उसी को पूरी गड़बड़ी का मास्टरमाइंड भी होने की चर्चा है।
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जांच के दायरे में 143 पट्टे, जांच पूरी होने का इंतजार


बताते हैं कि जांच कर रही टीम को अब तक पनौरा में 143 पट्टों की जानकारी मिली है। वर्ष 2085-86 के कुछ पट्टों की जांच भी की गई। वह सही पाए गए हैं लेकिन वर्ष 2007 में कितने लोगों को पट्टा दिया गया, उसकी प्रक्रिया किस तरह से अपनाई गई, बाहर के लोगों को पट्टा देने का आधार क्या बनाया गया? इसकी पत्रावली न मिलने से अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। फिलहाल 67 पट्टों की स्थिति संदिग्ध तो मिली हैं। कई और पट्टों में गड़बड़ी का अंदेशा जताया जा रहा है।

यहां भी आदिवासी महिलाओं के इस्तेमाल का मामला आया सामने

बघाड़ू की तरह पनौरा में भी जमीन हथियाने के लिए आदिवासी महिलाओं का इस्तेमाल किया गया है। जांच के लिए पहुंची टीम के सामने इस तरह का एक प्रकरण सामने आया है। इसके जरिए 10 बीघे जमीन हथियाने की कोशिश करने की शिकायत भी तहसील तक पहुंची है। इस मामले की भी जांच शुरू कर दी गई है। इसी तरह सर्वे में भी कब्जा किसी और का, नाम किसी और का दर्ज करने के मामले मिले हैं।





पनौरा में पट्टों की जांच में काफी गड़बड़ियां पाई गई हैं। एक-एक मामले के बारे में पता लगाया जा रहा है। फिलहाल 67 पट्टे संदिग्ध पाए गए हैं। उनसे संबंधित पत्रावली भी जांच के लिए नहीं मिल रही है। सर्वे में भी कब्जा किसी और का नाम किसी और का दर्ज होने की स्थिति सामने आई है। संबंधित लेखपाल-कानूनगो को एक-एक गाटे का विवरण उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। आदिवासी महिला के जरिये जमीन हथियाने के प्रयास की शिकायत मिली है। उसकी भी जांच की जा रही है। जल्द ही इसकी पूरी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दी जाएगी। -मनोज कुमार मिश्रा, नायब तहसीलदार, विजयगढ़।
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