देश के प्रथम राष्ट्रपति भारतरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्मदिन गुरुवार को अधिवक्ता दिवस के रूप में मनाया गया। राबर्ट्सगंज कचहरी परिसर स्थित सोनभद्र बार एसोसिएशन सभागार में आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि जिला जज धर्मवीर सिंह ने कहा कि देश के प्रथम राष्ट्रपति का गौरव प्राप्त करने वाले डॉ. राजेंद्र प्रसाद अधिवक्ता थे।
सर्व समाज के लिए कार्य करने के चरित्र को आदर्श मानते हुए इनके जन्मदिन को अधिवक्ता दिवस के रूप में मनाया जाता है।
जिला जज ने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सबसे ज्यादा कार्य संविधान निर्माण में किया है। इसमें दो साल 11 माह 18 दिन का समय लगा है। सिर्फ एक समाज की रक्षा से कोई बड़ा नहीं हो सकता।
इसके लिए सर्व समाज की रक्षा करना होगा, यह कार्य डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बखूबी किया था। यहीं वजह है कि अधिवक्ता समाज डॉ. राजेंद्र प्रसाद को अपना आदर्श मानता है और सर्व समाज के लिए भी वे प्रिय रहे।
वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण प्रताप सिंह ने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जीवन चार भागों में बंटा है। पहला वे अधिवक्ता रहे और हमेशा सर्व समाज को न्याय दिलाने के लिए कार्य किया।
दूसरा वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में देश की आजादी के लिए कार्य किया, तीसरा संविधान सभा के अध्यक्ष और निर्माता रहे और चौथा महामहिम राष्ट्रपति बने। यहीं वजह है कि आज वे हमारे आदर्श हैं। ऐसे में सभी लोगों को अधिकार रूपी भ्रम को त्याग कर कर्तव्य को करने की जरूरत है। प्रभाकर राम पाठक, भोला प्रसाद यादव और चंद्रभूषण प्रसाद मिश्र एडवोकेट ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. राजेंद्र प्रसाद के चित्र पर जिला जज धर्मवीर सिंह के जरिए माल्यार्पण कर और उमेश मिश्र एडवोकेट की ओर से प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। संचालन रामचंद्र मिश्र ने किया। अंत में अध्यक्षीय संबोधन में सोनभद्र बार एसोसिएशन अध्यक्ष ओम प्रकाश पाठक ने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद के जन्मदिन पर अधिवक्ता समाज को उनके मार्ग का अनुसरण करने का संकल्प लेना होगा तभी सही मायने में अधिवक्ता दिवस का सपना साकार होगा।
इस मौके पर प्रथम एडीजे वीके कांडपाल, एडीजे द्वितीय अजय कुमार श्रीवास्तव, एडीजे एफटीसी विवेक, सीजेएम संजय कुमार यादव, सिविल जज सिनियर डिविजन नितेंद्र कुमार, केएन मिश्रा, एमपी मिश्रा, चंद्रकांत शर्मा, गजेंद्र दीक्षित, ओपी राय, राजेंद्र चौधरी, पीए खान, एसए खान, अरुण पांडेय, सुरेश चंद्र श्रीवास्तव, विनोद चौबे, पीएन पांडेय, महेंद्र प्रसाद शुक्ल, प्रभाकर श्रीवास्तव, प्रदीप कुमार बगडिय़ा, बी. सिंह, मांडवी सिंह उज्जैन, सुनीता चतुर्वेदी, मनीष चतुर्वेदी, धर्मेंद्र द्विवेदी, शेष नरायन दीक्षित, रमेश राम पाठक, प्रदीप पांडेय, राधेश्याम मिश्र आदि मौजूद रहे।