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कागजों में खपा दिए लाखों, मौके पर नहीं मिला काम

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घोरावल ब्लॉक के हिनौता चेक डेम। - फोटो : SONBHADRA
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सोनभद्र। मनरेगा घोटाले में सीबीआई जांच से गुजर चुके जिले में फर्जी भुगतान के मामले थम नहीं रहे। बिना काम कराए ही कई गांवों में लाखों का भुगतान कर दिया गया है। कहीं चेकडैम की मरम्मत के नाम पर पैसे उतारे गए हैं तो कहीं खेत समतलीकरण का काम दिखाकर गड़बड़ियां हुई हैं। बंधी मरम्मत, पौधरोपण, चकरोड निर्माण के नाम पर भी खूब भुगतान किया गया है। इसकी पोल तब खुली जब सोशल ऑडिट की टीम गांव पहुंची। टीम की रिपोर्ट के बाद अब संबंधितों से जवाब तलब करते हुए रिकवरी की तैयारी है।
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करीब दस वर्ष पहले मनरेगा के तहत करोड़ों का घोटाला सामने आया था। पोखरा और चेकडैम निर्माण से जुड़े कच्ची मिट्टी के काम बिना कराए ही भुगतान कर दिया गया था। मजदूरों के बच्चों के लिए खिलौने, टेंट, डायरी आदि की खरीद में भी गड़बड़ी सामने आई थी। बाद में कोर्ट के आदेश पर इसकी सीबीआई जांच भी शुरू हुई। लंबे समय बाद भी जांच के नतीजे सामने नहीं आए हैं, मगर घोटाले का खेल फिर से शुरू हो गया है। वित्तीय सत्र 2021-22 के दौरान भी मनरेगा के तहत हुए कार्यों में खूब अनियमितता बरती गई हैं। सोशल ऑडिट के दौरान कई गांवों में इसकी पोल खुली है। अब तक घोरावल ब्लाक में सोशल ऑडिट का कार्य पूरा हुआ है। दुद्धी और कोन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जबकि तीन ब्लाकों में शनिवार से इसकी शुरुआत हुई। सोशल ऑडिट में कई जगह बिना काम कराए भुगतान का मामला सामने आया है तो कुछ जगह सामानों की खरीद व मजदूरी भुगतान में गड़बड़ी की गई है।
केस एक:
घोरावल ब्लाक के वीरकला गांव में लघु सिंचाई विभाग की ओर से 1.49 लाख रुपये खर्च कर चेकडैम की मरम्मत का कार्य कराया गया है, जबकि मौके पर कोई काम हुआ नहीं मिला है। इसी ब्लाक के हिनौती गांव में भी चेकडैम की मरम्मत पर 1.67 लाख रुपये कागजों में खर्च किए गए हैं। सोशल ऑडिट के दौरान यहां भी कोई काम नहीं पाया गया।
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केस दो:
कोन ब्लाक के नौडिहा गांव में बंधी मरम्मत का कार्य कराया गया है। इस मद में मनरेगा से 1.36 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। मौके पर काम के नाम पर बस औपचारिकता ही पूरी की गई है। कागजों में ही पूरी राशि खपाने की बात सामने आई है।
केस तीन:
घोरावल के ही एक अन्य गांव में खेत समतलीकरण के मद में 1.10 लाख रुपये का भुगतान हुआ है। खास बात यह रही कि जिस महिला के नाम पर यह काम दर्शाया गया है, उसका गांव में पता ही नहीं है। कई ग्रामीणों ने गांव में उस नाम की किसी भी महिला के न होने की जानकारी दी। फिलहाल इसकी रिपोर्ट जिले को भेजी गई है।
साइनबोर्ड के नाम पर भी उतारी गई राशि
बभनी और चतरा ब्लाक में मनरेगा के कार्यों के दौरान साइन बोर्ड लगाने के नाम पर भी घोटाला उजागर हुआ था। कागजों में कार्य स्थल पर साइन बोर्ड टांग दिए गए। उसका भुगतान भी कर दिया गया, जबकि अफसरों के निरीक्षण में बोर्ड नदारद मिला। विभिन्न गांवों से पिछले दिनों 36 हजार रुपये की रिकवरी कराई गई है।
मनरेगा के कार्यों की निगरानी बढ़ाई गई है। कई स्तर पर मॉनिटरिंग की जा रही है। अलग-अलग गांवों की ऑडिट रिपोर्ट सामने आई है। इसे कंपाइल कराने के बाद जहां भी गड़बड़ी सामने आई है, संबंधितों को नोटिस देकर जवाब लिया जाएगा। इसके बाद उनसे रिकवरी भी कराई जाएगी। - राजेंद्र प्रसाद, जिला कोऑडिनेटर सोशल ऑडिट।
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