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मजदूर नेताओं ने श्रम कानून को बताया श्रमिक विरोधी

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शक्तिनगर। बीएमएस से संबद्ध भारतीय कोयला खदान श्रमिक संघ की बैठक एनसीएल अमलोरी क्षेत्र में सोमवार रात हुई। इस दौरान नए श्रम कानूनों पर मंथन किया गया। मजदूर नेताओं ने श्रम कानून को श्रमिक विरोधी बताते हुए इसकी आलोचना की। कहा कि इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।
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मजदूर नेताओं ने कहा कि श्रम कानूनों में संशोधन मजदूर विरोधी है।
राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य वाईएन सिंह ने कहा कि भारत सरकार ने 29 श्रम कानूनों को निरस्त कर मात्र चार संहिता बनाई है। इसके चलते बाल श्रम कानूनी हो गया है। ठेकेदारी प्रथा अब ग़ैरकानूनी नहीं रही। बोनस एक्ट खत्म होने के साथ ही मालिकों का उत्तरदायित्व भी ख़त्म हो गया है। आठ घंटे के काम के अधिकार को खत्म कर मालिकों को ओवर टाइम लगाने की अनिवार्यता की इजाजत दे दी गई है। स्थायी कार्यों में भी फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट को बढ़ावा के चलते, रोजगार सुरक्षा खत्म हो गया है। एक टर्म पूरा होने पर मालिक चाहेगा तो रखेगा अन्यथा नहीं। कहा कि अब छंटनी व बंदी का रास्ता साफ हो जाएगा और सौ वर्कर की जगह जहाँ 300 से कम लोग काम करेंगे वहाँ प्रबंधन कभी भी सरकार को बिना बताए लोगों का छटनी या उद्योग को बंद कर सकती है।
उल्लेखनीय है कि भारतीय मजदूर संघ दस से 16 अक्टूबर तक देश में श्रम कानूनों के विरोध में जन जागरण, जागरूकता अभियान चला रहा है। 28 अक्तूबर को देशव्यापी आंदोलन कर धरना प्रदर्शन के माध्यम से भारत सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। इस मौके पर श्रमिक संघ के अध्यक्ष हीरामणि यादव, कार्यवाहक अध्यक्ष डीपी दुबे, उपाध्यक्ष राजमणि शर्मा, महामंत्री पीके सिंह, अमलोरी के अध्यक्ष अमर नाथ सिंह, कार्यवाहक अध्यक्ष सुशील कुमार सिंह, सचिव जेपी शुक्ला, संगठन मंत्री एनके सिंह, दिवाकर सिंह, रोशनलाल मिश्रा आदि रहे।
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