प्रीतनगर स्थित नर्मदेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में चल रहे श्री महामारूति नंदन यज्ञ के सातवें दिन गुरुवार को वृंदावन से पधारी बाल साध्वी ध्यानमूर्ति किशोरी जू महाराज ने श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता और कंस वध की कथा का वर्णन किया।
कंस वध होते ही श्रीकृष्ण के जयकारे से समूचा पांडाल गूंज उठा। श्रीकृष्ण-राधा की झांकी भी निकाली गई। जिसे देखकर लोग मंत्रमुग्ध हो गए।
बाल साध्वी ने कृष्ण-सुदामा मित्रता का वर्णन करते हुए कहा कि पानी परात को हाथ छुयो नहीं, नैनन के जल सो पग धोये। योगेश्वर श्रीकृष्ण अपने बाल सखा सुदामा की आवभगत में इतने विभोर हो गए कि द्वारिका नाथ हाथ जोड़कर और अंग लिपटाकर जल भरे नेत्रों से सुदामा का हाल-चाल पूछने लगे।
इस प्रसंग को सुनकर और कलाकारों के मंचन के दृश्य को देखकर लोगों के नेत्र सजल हो गए। ध्यानमूर्ति जी ने कहा कि श्रीकृष्ण भक्तवत्सल हैं। सभी के दिलों में बिहार करते रहते हैं। जरूरत है तो महज शुद्ध हृदय से उन्हें पहचानने की। निर्मल मन से जो भी उन्हें याद करता है उसे वे अक्षय भक्ति प्रदान करते हैं।
साध्वी ने कहा कि बाल सखा सुदामा को श्रीकृष्ण ने सबकुछ दिया, लेकिन सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि वे उन्हें भक्ति प्रदान की। सांसारिक मोहमाया में ग्रसित मानव ईश्वर की असीम सत्ता को भुला देता है। ईश्वर पथ में काम, क्रोध, मोह, लोभ और अहंकार ये पांच प्रकार के विकार बाधक हैं। अहंकार तो ईश्वर का भक्षण है। इसलिए अहंकार रहित निष्काम कर्मयोग से ईश्वर का भजन करने की आवश्यकता है। इस मौके पर बारमती देवी, विनोद सिंह, लालबाबू, दिनदयाल आदि रहे।