कनहर परियोजना को लेकर अमवार में हुए बवाल के दूसरे दिन बुधवार को भी विस्थापितों के तेवर तीखे रहे। कनहर नदी की दूसरी तरफ मौजूद निर्माण कराने वाली कंपनी (एचईएस) के कर्र्मियों को भगाने के साथ ही पत्थर और बड़ी वाली सीमेंटेड पाइप रखकर इस तरफ आने वाले रास्ते (अमवार-कोरची मार्ग) को जाम कर दिया। कार्यस्थल पर धरना देने के साथ ही जुलूस निकाल कनहर को बहने दो, हमें जिंदा रहने दो.. का नारा बुलंद किया।
मसले का निस्तारण होने तक किसी भी हाल में काम शुरू न होने देने की हुंकार भरी। शासन-प्रशासन के विरोध में भी जमकर नारे लगाए। उधर, अमवार पुलिस छावनी में तब्दील रहा। प्रशासनिक अमले की ओर से कुछ लोगों के जरिए विस्थापितों से वार्ता कर धरना खत्म कराने की कोशिश भी असफल साबित हुई। गोली लगने से घायल अकलू और हमले में चोटहिल कोतवाल का इलाज बीएचयू में चल रहा है। बाकी के घायल पुलिसकर्मी और विस्थापितों को मरहम पट्टी के बाद छुट्टी दे दी गई।
अवकाश से लौटने के बाद बुधवार सुबह डीएम संजय कुमार सीधे अमवार स्थित फील्ड हास्टल पहुंचे। वहां एसपी शिवशंकर यादव, सीडीओ महेंद्र सिंह सहित अन्य लोगों से घटना की जानकारी ली। फील्ड हास्टल में स्वयंसेवी संगठनों के लोगों से वार्ता करने के साथ ही, उनके जरिए विस्थापितों से संपर्क साध मामले को शांत कराने की कोशिश में सफलता नहीं मिली। विस्थापित धरने पर अड़े रहे। वहीं दूसरी तरफ पांच सौ से अधिक विस्थापित कार्यस्थल पर धरना देकर हमें हमारा अधिकार दो.. की आवाज बुलंद करते दिखे।
इसमें महिलाओं-बच्चों की भीड़ देख अफसरों के माथे पर चिंता की लकीरें बनी रहीं। फील्ड हास्टल में प्रशासनिक अमला वार्ता के लिए विस्थापितों के प्रतिनिधिमंडल का इंतजार भी करता रहा। दोपहर बाद विस्थापितों के एक गुट ने कनहर नदी की दूसरी तरफ निर्माण कंपनी के कर्मचारियों को भगाने के साथ ही उसके मशीनों को अपने कब्जे में ले लिया। इस तरफ जाने वाले रास्ते (अमवार-कोरची मार्ग) को जाम कर खलबली मचा दी। देर शाम तक प्रशासनिक एवं पुलिस अमला बात को लेकर रास्ता नहीं निकाल सका। तनाव को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी डेरा डाले हुए हैें। किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बनने पाए इसके लिए दो हजार से अधिक पुलिस-पीएसी जवान मुस्तैद है। महिला सीओ के साथ ही सभी एसओ के साथ ही दारोगाओं की भी कार्यस्थल पर तैनाती बनी रही। बताते चलें कि मंगलवार की सुबह छह बजे विस्थापितों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। लाठीचार्ज, पत्थरबाजी के बाद पुलिस की गोली से अकूल सहित 12 विस्थापित घायल हो गए थे। जबकि कोतवाल सहित 12 पुलिसकर्मी भी चोटहिल हुए थे।