सोनभद्र। सदर ब्लॉक के कबरी ग्राम पंचायत में आवास निर्माण में गड़बड़ी सामने आई है। आवास के लाभार्थी के बजाय मनरेगा मजदूरी का पैसा किसी और के खाते में भेज दिया गया। कोर्ट के आदेश पर जांच हुई तो इसकी पोल खुली। दो पंचायत सचिव, रोजगार सेवक और मनरेगा कंप्यूटर ऑपरेटर दोषी पाए गए। उन्हें नोटिस देकर सरकारी खाते में धनराशि जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रकरण वर्ष 2022-23 में किए गए आवास आवंटन से जुड़ा है। गांव निवासी जब्बार ने सीजेएम की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल कर आरोप लगाया था कि आवास निर्माण पर लगने वाली मजदूरी उसने व्यय किया, लेकिन धनराशि किसी इजहार नामक व्यक्ति के खाते में भेज दी गई।
दावा किया गया कि वह लाभार्थी नहीं है फिर भी उसके खाते में मजदूरी भेजी गई। न्यायालय ने संबंधित अफसरों से आख्या तलब की। बीडीओ के जरिये इसकी जांच कराई गई तो पता चला कि आरोप सही हैं। इसके बाद तत्कालीन पंचायत सचिव शिवकुमार, मौजूदा पंचायत सचिव प्रमोद कुमार, कंप्यूटर ऑपरेटर नीरज विश्वकर्मा और संबंधित ग्राम रोजगार सेवक को दोषी पाया गया।
सदर बीडीओ की तरफ से चारों को जारी किए गए पत्र में कहा गया है कि सहायक विकास अधिकारी सांख्यिकी और अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी की जांच में चारों को संयुक्त रूप से दोषी पाया गया। जांच में सामने आया है कि बगैर परीक्षण वास्तविक लाभार्थी की बजाय दूसरे जॉबकार्ड धारक के खाते में मजदूरी भेज दी गई।
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जिनका आवास कर दिया था निरस्त उनके खाते में भेज दी मजदूरी
ग्राम पंचायत कबरी से जुड़ा एक और मामला सुर्खियों में है। इस गांव के पंकज पांडेय ने पिछले महीने अधिकारियों से शिकायत की थी कि उनकी पत्नी के नाम वर्ष 2022-23 में आवास आवंटित हुआ था। 20 फरवरी 2023 को 44 हजार की पहली किश्त भी उनके पत्नी के खाते में आ गई लेकिन पहले पात्र ठहराने वाले लोगों ने उन्हें अपात्र बताते हुए धनराशि फ्रीज करा दी। 20 जून 2023 को धनराशि खाते से वापस ले ली गई। जिस आईडी से आवास आवंटित करने के बाद अपात्र ठहराया गया था। उसी आईडी का इस्तेमाल कर मई से सितंबर 2025 के बीच चार बार में मनरेगा मजदूरी के 15120 रुपये खाते में भेज दिए गए। उनका आरोप था कि इसके बाद फोन कर दबाव बनाया जाने लगा कि उक्त रकम निकालकर उन्हें सौंप दी जाए। इस मामले की जांच की जा रही है।
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कोन की कई ग्राम पंचायतों में ऐसी शिकायतें
सिर्फ सदर ब्लाक के कबरी ही नहीं कोन ब्लाॅक के रोरवा, बागेसोती, कचरनवा, मिटिहिनिया में भी वर्ष 2021-22 और वर्ष 2022-23 में आवंटित किए गए आवासों को लेकर भी इसी तरह के आरोप लगाए जा चुके हैं। अफसरों की तरफ से इसको लेकर जांच के निर्देश तो जारी हैं कई आवास निर्मित हुए बगैर ही पूरी धनराशि और मनरेगा मजदूरी भुगतान का मामला सामने आ चुका है लेकिन अभी यह प्रकरण जांच के नाम पर लटका हुआ है।
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जांच में तत्कालीन पंचायत सचिव, मौजूदा पंचायत सचिव, रोजगार सहायक और कंप्यूटर ऑपरेटर संयुक्त रूप से दोषी पाए गए हैं। उन्हें दूसरे के खाते में भेजी गई धनराशि सरकारी खाते में जमा करने का निर्देश दिया गया है। - लालजी शुक्ला, बीडीओ राॅबर्ट्सगंज