सोनभद्र/रामगढ़। चतरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बच्चे को बुखार की एक्सपायर दवा देने के मामले की जांच शुरू हो गई है। सीएमओ ने दो सदस्यीय टीम गठित की है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि पीएचसी को संबंधित बैच की दवा आवंटित ही नहीं की गई थी। ऐसे में यह दवा कैसे वितरित हुई, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।
चतरा ब्लॉक के ओरगाई गांव निवासी अभिनंदन अपने चार माह के शिशु शिवांश को नियमित टीकाकरण के लिए लेकर पीएचसी चतरा पहुंचे थे। टीका लगाने के बाद स्टाफ ने बच्चे को बुखार आने की आशंका बताकर पैरासिटामोल सिरप दे दिया था। घर पहुंचने पर परिजनों की नजर पड़ी तो शीशी पर उत्पादन तिथि जून 2023 और एक्सपायरी मई 2025 दर्ज थी।
परिजनों ने तुरंत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। मामले का शासन स्तर से संज्ञान लिए जाने के बाद शुक्रवार की सुबह नौ बजे ही प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सतीश पटेल के नेतृत्व में एक टीम अभिनंदन के घर पहुंची और इस बारे में जानकारी ली। परिजनों ने अस्पताल के ओपीडी के दवा वितरण काउंटर से दवा दिए जाने की बात कही।
सीएमओ ने एसीएमओ डॉ. जीएस यादव और अस्पताल पंजीकरण के नोडल अधिकारी डॉ. कीर्ति आजाद बिंद को मामले की जांच की जिम्मेदारी दी है। तीन दिनों में रिपोर्ट तलब की गई है। टीम ने दोपहर में चतरा पीएसी पहुंचकर दवा वितरण काउंटर और स्टोर रूम की जांच की। बच्चे के परिजनों से भी मुलाकात की।
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बिना एलाटमेंट के बांटी जा रही थी दवा
दवा कार्पोरेशन के नियमों के मुताबिक ड्रग वेयर हाउस के पोर्टल से एक्सपायर होने के तीन माह पूर्व ही पोर्टल से दवा कटनी बंद हो जाती है। जो एक्सपायर दवा दी गई है, उस बैच की दवा ड्रग वेयर हाऊस को 2024 में मिली थी। वहीं, मई 2024 के आसपास ड्रग वेयर हाउस से दवा का स्टाॅक खत्म हो गया था। जिस बैच की एक्सपायर दवाएं चतरा पीएचसी के ओपीडी के दवा वितरण काउंटर से दिए जाने की बात सामने आई है, वह अस्पताल को ड्रग वेयर हाऊस से कभी अधिकृत तौर पर एलाट नहीं हुई थी। इस दवा को बकवार पीएचसी, खलियारी, चिचलिक, पनौरा सहित दस से 12 अन्य अस्पतालों को भेजा गया था। इनमें कुछ अस्पताल पीएचसी चतरा के आसपास हैं।
प्रभारी और फार्मासिस्ट से स्पष्टीकरण तलब
मामले में सीएमओ ने पीएचसी प्रभारी से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। उनसे स्टाॅक विवरण, डिमांड सहित अन्य दस्तावेज तलब किए गए हैं। वहीं प्रभारी चिकित्साधिकारी ने अस्पताल के फार्मासिस्ट से रिपोर्ट तलब की है। प्रथम दृष्टया जांच में यह स्पष्ट हुआ कि दवा को ओपीडी के काउंटर से दिया गया था। ऐसे में छह माह से एक्सपायर दवा फार्मेसी पर उपलब्ध थी तो इस पर किसी की नजर क्यूं नहीं पड़ी। आखिर कितने बच्चों को यह दवा दी गई।
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वर्जन...
मामले में दो सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई है, टीम ने जांच की है। चतरा पीएचसी को इस बैच की दवा कभी आवंटित नहीं हुई थी। ऐसे में यह दवा किन परिस्थितियों में वितरित हुई, जांच रिपोर्ट के बाद भी स्पष्ट होगा। मामले में जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। - डॉ.पीके राय, सीएमओ।