सोनभद्र। नशीले कफ सिरप की तस्करी के मामले में न्यायालय ने भी सख्त रुख दिखाया है। नशे के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे सिरप को मानव के लिए खतरनाक मानते हुए कोर्ट ने तीन आरोपियों को राहत देने से इन्कार कर दिया।
साथ ही इसकी बाजार में बिक्री और अनुभव के आधार पर ड्रग लाइसेंस हासिल करने को गंभीर मामला माना है। अदालत ने अक्तूबर में कफ सिरप की खेप के साथ गिरफ्तार एक आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। वहीं, फर्जी आपूर्ति दिखाने वाले फर्म संचालक दो भाइयों की अग्रिम जमानत अर्जी अस्वीकार कर दी।
18 अक्तूबर की रात पुलिस और आबकारी की संयुक्त टीम ने राॅबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के इको प्वाइंट के पास कफ सिरप लदे दो कंटेनर पकड़े थे। साथ ही मौके से तीन तस्कर गिरफ्तार किए गए थे। एक की जमानत अर्जी पहले ही खारिज कर दी गई थी। दूसरे आरोपी हेमंत पाल ने भी अर्जी दाखिल की गई थी। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट आबिद शमीम की अदालत ने की।
अदालत ने कहा कि नशे के लिए तस्करी कर ले जाया जा रहा कफ सिरप मानव के लिए हानिकारक था। मामला गंभीर होने के कारण जमानत नहीं दी जा सकती। इसी तरह कफ सिरप तस्करी के आरोप फर्मों के संचालक सगे भाई सत्यम कुमार और विजय गुप्ता निवासी गोला दीनानाथ, कबीरचौरा, वाराणसी ने जिला सत्र न्यायाधीश की अदालत में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी। दलील दी थी कि उनकी फर्म रजिस्टर्ड है। कहीं से भी एनडीपीएस का मामला नहीं बनता। सिरप लाइसेंसी फर्म शैली ट्रेडर्स से खरीदा था और लाइसेंसी मेडिकल स्टोर को बेचा था। अभियोजन का तर्क था कि आरोपी कोडिनयुक्त सिरप के अवैधानिक तरीके से क्रय-विक्रय में लिप्त है। फर्जी फर्मों को आपूर्ति दिखाते हुए सिरप की कालाबाजारी की गई।
न्यायालय ने कहा कि प्रथम सूचना रिपोर्ट और थाने की आख्या के अवलोकन से स्पष्ट है कि फर्जी फर्मों को आपूर्ति दिखाते हुए सिरप को नशे के रूप में उपयोग के लिए काले बाजार में बेचा गया। इसके लिए महज अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर गलत तरीके से ड्रग लाइसेंस प्राप्त किया गया। प्रकरण की विवेचना भी अभी जारी है। अग्रिम जमानत का प्रार्थना पत्र स्वीकार नहीं किया जा सकता।