नीति आयोग के आकांक्षी जनपद सोनभद्र में विकास कार्यों को रफ्तार देने के लिए सभी महत्वपूर्ण पदों को भरने का निर्देश है। इससे इतर नगरीय क्षेत्रों में ईओ का पद ही खाली है। जिले की दस में से छह निकायों में अधिशासी अधिकारी (ईओ) तैनात नहीं हैं। किसी निकाय में एक वर्ष से तो कहीं छह माह से पद खाली हैं। इससे इन निकायों में विकास संबंधित कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
जिले की सबसे पुरानी निकाय घोरावल नगर पंचायत में स्थाई ईओ का पद करीब एक साल से खाली है। नगर पालिका सोनभद्र के ईओ विजय कुमार यादव के पास अतिरिक्त प्रभार है। इसी तरह चोपन नगर पंचायत में भी करीब एक साल से स्थाई ईओ नहीं हैं।
महेंद्र सिंह के तबादले के बाद डाला की ईओ देवहुति पांडेय के पास प्रभार था। उनके स्थानांतरण के बाद करीब पांच माह तक रेणुकूट के ईओ लल्लन राम यादव चार्ज में रहे। पिछले माह उनका भी तबादला होने के चोपन और रेणुकूट ईओ विहीन हो गया।
सबसे बड़ी निकाय अनपरा की ईओ ऋचा यादव का स्थानांतरण होने से अनपरा और प्रभार वाले निकाय दुद्धी में करीब एक माह से ईओ का पद खाली है। चुर्क नपं के ईओ अमित कुमार सरोज के पास डालाबाजार नपं का अतिरिक्त प्रभार है।
डालाबाजार और घोरावल में प्रभारी ईओ के सहारे काम तो चल रहा है, मगर चोपन, रेणुकूट, अनपरा और दुद्धी नगर पंचायत में अब तक न तो स्थायी ईओ की तैनाती हुई और न ही यहां का किसी को प्रभार सौंपा गया। ईओ न होने की वजह से लोगों को जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र सहित अन्य कई कार्यालय संबंधी कामकाज के लिए चक्कर काटना पड़ रहा है।