फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sonebhadra News: पेट में आज दर्द हुआ तो अल्ट्रासाउंड के लिए 25 दिन बाद मिलेगा नंबर

विज्ञापन
विज्ञापन
सोनभद्र। दुआ करिए कि आपको ऐसी कोई बीमारी न हो, जिसमें अल्ट्रासाउंड जांच की जरूरत पड़े। जिले में सिर्फ जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा है, लेकिन यहां भीड़ के कारण नंबर लगाने के बाद 20-25 दिन तक का इंतजार करना पड़ेगा। तय तिथि पर पहुंचने के बाद भी डॉक्टर के मिलने का कोई भरोसा नहीं है। जेब में पैसे हैं तो निजी केंद्र के विकल्प हैं, लेकिन अधिकांश आदिवासी आबादी के सामने सिवाय इंतजार या रेफर होने का कोई रास्ता नहीं।
विज्ञापन

स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से अति पिछड़े जिले को नीति आयोग ने आकांक्षी जिले के रूप में चिह्नित किया है। सौ किमी से अधिक लंबे परिक्षेत्र वाले जिले में अल्ट्रासाउंड की सेवा के लिए मरीज भटकने को मजबूर हैं। पूरे जिले में सिर्फ जिला अस्पताल में ही अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा है, लेकिन यहां भी नियमित रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में व्यवस्था जुगाड़ के भरोसे चल रही है। दूर-दराज से आने वाले मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। यह इंतजार 20-25 दिन का है। अगर आज की तारीख में अल्ट्रासाउंड के लिए नंबर लगाएं तो फिर नवंबर से पहले आपकी जांच संभव नहीं है। इस बीच मरीज की स्थिति क्या हो सकती है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। गरीब परिवारों के सामने कोई विकल्प ही नहीं।
तय तिथि पर पहुंचे तो भी नहीं मिल रहे डॉक्टर, घंटों करना पड़ा इंतजार
जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था जुगाड़ की है। इसके तहत निजी केंद्रों के रेडियोलॉजिस्ट को एक-एक दिन के लिए अस्पताल से संबंद्ध किया गया है। निजी डॉक्टर होने के कारण उन पर किसी का जोर भी नहीं है। लिहाजा कई बार तय तिथि पर भी सुबह से अस्पताल पहुंचने के बाद मरीजों को डॉक्टर का घंटों इंतजार करना पड़ता है। बुधवार को भी कुछ ऐसी ही स्थिति रही। मरीजों की भीड़ अल्ट्रासाउंड केंद्र के बाहर थी, जबकि पौने 11 बजे तक डॉक्टर का पता नहीं था। भूखे-प्यासे मरीज परेशान नजर आए।
विज्ञापन

करीब एक माह बाद जांच के लिए नंबर आया है। सुबह से ही पर्ची जमा कर डॉक्टर का इंतजार कर रही हूं। जांच कब होगी पता नहीं। -शीला, डाला।
अल्ट्रासाउंड गंभीर होने पर ही कराया जाता है, लेकिन यहां लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। सही समय पर जांच न होन से उपचार में भी दिक्कत आ रही है। -दुर्गावती, कनछ।
लंबे समय से इंतजार के बाद आज नंबर आया है। सुबह से ही डॉक्टर इंतजार कर रही हूं। भूखे रहने के कारण समस्या का सामना करना पड़ रहा है। -रेनू, बभनौली।-
पहले से नंबर मिला था तो लगा कि ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा। यहां घंटों बीत गए, मगर डॉक्टर का पता नहीं। निजी केंद्रों पर जा सकती। इंतजार करना मजबूरी है। -किरण, मधुपुर।
सामान्य बीमारियों में भी डॉक्टर अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह पहले देते हैं, लेकिन यहां जांच की सुविधा ही नहीं है। इंतना लंबा इंतजार होगा तो फिर मरीज ठीक कैसे होगा। -रोहित, पसिया गांव।
बाहर जांच कराने में सात सौ से एक हजार रुपये तक खचे हो जाएंगे। जिला अस्पताल में कोई शुल्क नहीं है, लेकिन ऐसी व्यवस्था में समय से उपचार भी नहीं हो पाएगा। - देवी, लोढ़ी।
चार अस्पतालों पर धूल फांक रही मशीनें
आदिवासी अंचल के लोगों की सहूलियत के लिए जिले के घोरावल, चोपन, डिबुलगंज सहित चार अस्पतालों पर अल्ट्रासाउंड जांच के लिए करीब डेढ़ साल पहले मशीनें उपलब्ध कराई गई थीं। लोगों में उम्मीद थी कि इससे सहूलियत मिलेगी। लंबा समय बीतने के बाद भी इन मशीनों को चालू हुई हैं। इसके पीछे टेक्निशियन का अभाव मुख्य वजह है। स्टाफ को ही प्रशिक्षण देकर मशीनों के संचालन की भी कवायद की गई, लेकिन यह भी पूरी नहीं हो सकी।
स्थायी रेडियोलॉजिस्ट न होने के चलते निजी केंद्राें के डॉक्टरों को संबंद्ध कर अल्ट्रासाउंड का संचालन किया जा रहा है। भीड़ अधिक होने के चलते मरीजों को थोड़ा इंतजार करना पड़ता है, मगर इमरजेंसी केस वाले मरीजों को परेशानी नहीं होने दी जाती। - डॉ. डीके सिंह, अधीक्षक, जिला अस्पताल।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें