सोनभद्र। सोनभद्र, गोरखपुर और कुशीनगर में आधुनिक कार्यशाला, प्रशिक्षण कक्ष के निर्माण कार्य का जिम्मा ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईडी) से हटा लिए जाने पर खलबली मची है। इसके लिए संबंधितों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इस पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने नाराजगी जताई है। मुख्य अभियंता ने तीनों जिलों के अधिशासी अभियंताओं से जवाब तलब किया है।
निदेशक एवं मुख्य अभियंता इसम सिंह की तरफ से भेजे पत्र में कहा गया है कि टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड के सहयोग से फेज दो के तहत सोनभद्र की घोरावल, गोरखपुर की चौरी-चौरा, बड़हलगंज, कैंपियरगंज, खजनी और कुशीनगर की हाटा आईटीआई के लिए आधुनिक कार्यशाला-प्रशिक्षण कक्ष का निर्माण किया जाना था। इसकी जिम्मेदारी आरईडी को सौंपते हुए छह माह में कार्य पूर्ण करने की हिदायत दी गई थी। पिछले दिनों शासन स्तर पर समीक्षा में पाया गया कि पांच माह बीतने के बाद भी काम शुरू नहीं हो सका है। इस पर संयुक्त सचिव व्यवसायिक शिक्षा ने 15 सितंबर को इसकी जिम्मेदारी यूपी प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड को सौंप दी। प्रकरण डिप्टी सीएम केपी मौर्य के संज्ञान में आया तो उन्होंने जवाब तलब करने के निर्देश दिए।
जेई पर लगाए गंभीर आरोप, वर्षों से तैनाती की डिप्टी सीएम से शिकायत
आरईडी के एक जेई पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। महज मिर्जापुर मंडल में 30 वर्ष से तैनाती का दावा करते हुए भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष धर्मवीर तिवारी ने डिप्टी सीएम को शिकायत भेजी है। कहा है कि जिले में अकेले उन्हें ही 50 कार्य आवंटित किए गए हैं। अन्य जेई खाली हैं। संबंधित जेई के जरिये डीएमएफ में बड़े खेल का दावा करते हुए डीएमएफ के लेखाकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
कहीं कोई लापरवाही नहीं हुई है। टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी। शासन स्तर पर पालिसी के तहत कार्य दूसरे को दिया गया है। जहां तक जेई की वर्षों से तैनाती का मामला है तो यह शासन-निदेशालय का नीतिगत मामला है। -नूर आलम, एक्सईएन ग्रामीण अभियंत्रण विभाग।