होली की तैयारी जोरों पर है लेकिन मनरेगा कर्मियों और इस योजना में काम करने वाले मजदूरों के लिए होली बेरौनक है। कर्मियों को छह माह से मानदेय नहीं मिला है तो 35 हजार मजदूर भी महीनों से मजदूरी के इंतजार में हैं।
जिले के 621 गांवों में मनरेगा के तहत तालाब खोदाई, चकरोड निर्माण, वन वाटिका सहित अन्य कार्य कराए गए हैं। पिछले चार महीनों से काम ठप है। इसके पीछे बजट का अभाव प्रमुख वजह है। मजदूरों को पिछली मजदूरी का भुगतान नहीं हाे पाया है। ऐसे में वह काम नहीं कर रहे।
लगातार ठेकेदार, प्रधान और रोजगार सेवक पर मजदूरी देने का दबाव बना रहे हैं, मगर उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। पूरे जिले से करीब 21 करोड़ रुपये का बकाया है। मजदूरों को उम्मीद थी कि होली से पहले उन्हें मजदूरी मिलेगी तो वह अच्छे से त्योहार मना पाएंगे, लेकिन उनकी उम्मीदें टूट रही हैं।
मजदूरों के अलावा मनरेगा के तहत नियुक्त कर्मचारियों को भी छह माह मानदेय नहीं मिल रहा। पूरे जिले में करीब 450 परिवार प्रभावित हैं। इसमें रोजगार सेवक, तकनीकी सहायक व अन्य शामिल हैं।