राबर्ट्सगंज श्री गुरु सिंह सभा में गुरुतेग बहादुर के शहीदी दिवस पर शबद कीर्तन करते सिख बंधू।
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गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा राबर्ट्सगंज में बुधवार को गुरु तेग बहादुर जी का शहीदी पर्व मनाया गया। सिख समाज के लोगों ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। सबद-कीर्तन के बाद लंगर चलाकर प्रसाद बांटा।
ग्रंथी ने बताया कि गुरु तेग बहादुर जी का जन्म 1621 में अमृतसर में हुआ था। इनका नाम त्यागमल था लेकिन उन्हें तलवार चलाने में महारथ हासिल थी, इसलिए उनका नाम तेग बहादुर रख दिया गया। वह शुरू से ही शांत स्वभाव, गंभीर, निर्भय थे। अक्सर समाधि लगा लेते थे, तो माताजी चिंता करती थीं। इनके पिताजी यही कहते कि इन्हें बड़े होकर बहुत ही बड़े काम करने हैं। यह उसकी तैयारी कर रहे हैं। एक बार गुरु तेग बहादुर को गिरफ्तार करके दिल्ली लाया गया और शर्त रखी गई वे मुसलमान हो जाएं, पर वे नहीं मानें। अंत में उनके शिष्य भाई मनीदास को आरे से चिरवा दिया गया। भाई सतीदास को रुई में लपेट कर जिंदा जला दिया गया। भाई दयाला को तेल में उबाल दिया गया। इसके बाद चांदनी चौक दिल्ली में गुरु तेग बहादुर जी को शहीद कर दिया गया। वहीं पर आज शीशगंज गुरुद्वारा सुशोभित है। कार्यक्रम के अंत में प्रसाद लंगर का वितरण किया गया। इस मौके पर रंजीत सिंह, देवेंद्र सिंह, दया सिंह, अजीत सिंह, बलकार सिंह, मनजीत सिंह, गोल्डी, मनमीत सिंह, कमलेश सिंह, गुरप्रीत सिंह, हनी सिंह, हरजिंदर सिंह, अर्जुन सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन जसवीर सिंह ने किया।