जिले में बुधवार को गुरु नानक देव का 546वां प्रकाश उत्सव मनाया गया। इस
मौके पर राबर्ट्सगंज स्थित गुरुद्वारा को पुष्प से सजाया गया था।
इस मौके
पर गाजे-बाजे के साथ गुरु ग्रंथ साहब की शोभायात्रा निकाली गई। इसमें
महिलाएं, बच्चे और पुरुष भजन-कीर्तन करते हुए आगे बढ़ रहे थे। शोभा यात्रा
से पहले सड़क पर महिलाएं झाडू लगाते हुए आगे बढ़ रही थीं।
गुरुद्वारे
में छत्तीसगढ़ से आए रागी जत्था के भाई दविंदर सिंह और निरोल व उनके
साथियों ने भजन कीर्तन व कथा की। सुरेंद्र सिंह और दया सिंह ने भजन-कीर्तन
किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सरदार जसबीर सिंह ने कहा कि गुरु
नानक का जन्म 1949 पाकिस्तान के तलबंडी नामक स्थान पर हुआ था। गुरु नानक को
दो पुत्र थे जिनका नाम बाबा श्रीचंद्र व बाबा लक्ष्मीदास था। श्रीचंद्र
अखंड ब्रम्हचर्य में रहते हुए भारत भूमि को एकता में बांधने का कार्य किया।
इन्होंने बैरागी रहकर पूरे भारत का भ्रमण किया व जगह-जगह उठासी मठ व नानक
पंथी गुरूद्वारों की स्थापना की। गुरु नानक देव ने घर, सुख, परिवार को छोड़
कर अपने जीवन काल में कई देशों की यात्रा किया। उनके साथ हमेशा भाई बालाजी
और मरदाना साथ रहते थे।
बालाजी हिंदू और मरदाना मुस्लिम थे। शोभायात्रा
में मिर्जापुर से आए मटका पार्टी के सदस्य करतब दिखाते हुए चल रहे थे। गुरु
नानक बालिका इंटर कालेज की छात्राएं पीटी कर रही थी। नगर के विभिन्नि
मार्गों का भ्रमण कर यात्रा रात करीब आठ बजे गुरुद्वारा पुन: पहुंची।