सोनभद्र। 13 अप्रैल से शुरू हो रहे वासंतिक(चैत्र) नवरात्र को लेकर तैयारी तेज हो गई है। देवी मंदिरों के पास अस्थायी तौर पर फूल-माला की दुकानें सजने लगी हैं। मंदिरों के साफ-सफाई और सजावट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मातारानी का इस नवरात्र में अश्व की सवारी पर आगमन हो रहा है, जबकि प्रस्थान नरवाहन पर होगा। ज्योतिषाचार्य डा.एसएन तिवारी ने बताया कि मातारानी का अश्व के सवारी पर आगमन होना राजनीति में उलट-पलट के साथ सत्ता परिवर्तन का कारण बनेगा। नरवाहन पर मातारानी का प्रस्थान सुख-समृद्धि को प्रदान करने वाली है। उन्होंने बताया कि नवरात्र के दिनों में आत्मीय शुद्धि के साथ मातारानी का पूजा पाठ करना चाहिए। इन दिनों कन्या पूजन करने का विशेष महत्व है। मातारानी के पूजन के दौरान सर्व समाज के हित की कामना करनी चाहिए। हर व्यक्ति को घर में पूजा पाठ करने के साथ ही दुर्गा सप्तसति व दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए। मंगलवार से शुरू हो रहे वासंतिक नवरात्र को लेकर भक्तजनों की तरफ से तैयारी चल रही है। नवरात्र में कलश स्थापना कराकर नौ दिन तक दुर्गा सप्तसती का पाठ कराने के लिए लोग पुजारी से संपर्क कर रहे हैं। वहीं देवी मंदिरों के आस-पास दुकानें सजने लगी हैं।
माता को तिथिवार भोग लगाने का है विधान
सोनभद्र। धर्मग्रंथों में देवी को अलग-अलग तिथियों में अलग-अलग भोज्य पदार्थ का भोग लगाने का वर्णन है। प्रतिपदा को गाय का घी भोग लगाने से रोग से मुक्ति, द्वितिया को चीनी का भोग लगाने से दीर्घायु, तृतीया को दूध का भोग लगाने से दुखों से मुक्ति, चतुर्थी को मालपुआ का भोग लगाने से हर तरह की विपत्तियों से छुटकारा, पंचमी को केला के भोग से बौद्धिक क्षमता में वृद्धि, षष्ठी को मधु (शहद) से सुंदर स्वरूप की प्राप्ति, सप्तमी को गुड़ का भोग लगाने से शोक और तनाव से मुक्ति, अष्टमी को नारियल के भोग से अवसाद तथा आत्मग्लानि से मुक्ति और नवमी को धान का लावा चढ़ाने से लोक-परलोक सुखकर होता है।