सोनभद्र। राशन कार्ड विहीन परिवाराें की फैमिली आईडी बनाने के मामले में जिले के चार ब्लॉक फिसड्डी साबित हो रहे हैं। ये वे क्षेत्र हैं, जहां नेटवर्क व अन्य सुविधाएं अच्छी स्थिति में हैं। इन ब्लॉकों में प्रगति राज्य औसत 65.78 प्रतिशत से भी काफी नीचे है। सबसे खराब स्थिति करमा ब्लॉक की है, जहां 48.47 फीसदी ही लक्ष्य पूरा हो पाया है।
पात्रता के बावजूद शासन की विभिन्न योजनाओं से वंचित परिवारों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए फैमिली आईडी बनाया जा रहा है। राशन कार्ड की तरह ही यह आईडी परिवार की पहचान का पुख्ता दस्तावेज होगा।
इसकी मदद से सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाया जाना है। जिले में करीब 35 हजार परिवारों की फैमिली आईडी बनाने का लक्ष्य रखा है। सभी दस ब्लॉकों में से छह में फैमिली आईडी बनाने की प्रगति अच्छी है। चोपन, म्योरपुर, दुद्धी, कोन, बभनी और घोरावल जैसे सुदूर इलाकों के ब्लॉकों में कम संसाधनों के बावजूद फैमिली आईडी बनाने की प्रगति राज्य औसत से ज्यादा है। दूसरी ओर मुख्यालय से सटे चार ब्लॉकों में स्थिति काफी खराब है। इन ब्लॉकों में 60 फीसदी का भी आंकड़ा पूरा नहीं हो पाया है। मनरेगा श्रमिकों की फैमिली आईडी बनाने की प्रगति तो सबसे खराब महज 9 प्रतिशत है। शासन की ओर से नियमित निगरानी कराई जा रही है। चार ब्लॉकों में सुस्ती से जिले की रैंकिंग पर भी प्रभाव पड़ रहा है।
फेमिली आईडी बनाने का कार्य शासन की प्राथमिकता में है। चार ब्लॉकों में इसकी प्रगति राज्य औसत से भी नीचे हैं। संबंधितों को इसमें तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही पर कार्रवाई भी की जाएगी। -एसपी वर्मा, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी।