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Sonebhadra News: खालसा पंथ का स्थापना दिवस, गुरुद्वारे में बैसाखी उत्सव धूमधाम से मनाया गया

Sun, 13 Apr 2025 06:00 PM IST
नितीश कुमार पांडेय अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र

सार

खालसा पंथ का स्थापना दिवस मनाया गया। इस दौरान बैसाखी उत्सव के रूप में कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस दौरान साज सज्जा की गई और लंगर भी चला।
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गुरूद्वारे में मनाया गया बैसाखी उत्सव - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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रॉबर्ट्सगंज स्थित गुरुद्वारा गुरुसिंह सभा में रविवार को बैसाखी की धूम रही। सिख संगत ने गुरुवाणी का पाठ किया। शबद-कीर्तन करते हुए गुरुजी की महिमा गाई। इस दौरान पूरे गुरुद्वारा परिसर को रंग-बिरंगी माला और झालरों से भव्य रूप से सजाया गया था। भक्तों ने जमकर लंगर भी छका।

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कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10 बजे तीन दिवसीय श्री अखंड पाठ के समापन के साथ हुई।गुरुबाणी की मधुर वाणी से वातावरण भक्तिमय हो उठा। भाई सुरजन सिंह और दया सिंह ने संगत को गुरु वाणी का सुमधुर गायन सुनाया। इस अवसर पर ज्ञानी हरविंदर सिंह ने संगत को खालसा पंथ की स्थापना और इसके ऐतिहासिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

गुरुद्वारा समिति के अध्यक्ष जसबीर सिंह ने बैसाखी के ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भों को साझा करते हुए बताया कि किस तरह 1699 में श्री गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। उन्होंने बताया कि उस समय समाज में जातिवाद, अंधविश्वास और धार्मिक उत्पीड़न चरम पर था। ऐसे समय में गुरु गोविंद सिंह ने जाति-पाति से ऊपर उठकर एक ऐसे समाज की रचना की।
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जिसकी पहचान उसके साहस, समर्पण और समानता के सिद्धांतों पर आधारित थी। उन्होंने बताया कि गुरु जी ने पांच अलग-अलग जातियों और स्थानों के पांच लोगों को अमृतपान कराकर ‘पंच प्यारे’ बनाया और खालसा पंथ की नींव रखी। उन्होंने सिखों को पांच ककार केश, कड़ा, कृपाण, कंघा और कच्छा धारण करने का आदेश दिया। साथ ही पुरुषों को ‘सिंह’ और महिलाओं को ‘कौर’ उपनाम धारण करने का निर्देश दिया।
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