रिपोर्ट के अनुसार करीब 6905 वर्ग किमी के भौगोलिक क्षेत्रफल वाले इस जिले में वर्ष 2019 में वन क्षेत्र का दायरा 2540.29 वर्ग किमी था। वर्ष 2021 के सर्वे में यह घटकर 2436.75 वर्ग किमी रह गया है। इस तरह यहां करीब 103.54 वर्ग किमी वन क्षेत्र में कमी आई है। इसमें भी 138.32 वर्ग किमी में घने जंगल हैं जबकि 1357.81 वर्ग किमी में खुला वन क्षेत्र है। शेष 940 वर्ग किमी से अधिक के दायरे में मध्यम श्रेणी का वन है।
राबर्ट्सगंज डीएफओ संजीव सिंह ने कहा कि विस्तृत रिपोर्ट मंगाई जा रही है। कहां-किस क्षेत्र में वन कम हुए हैं, इसका अध्ययन करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। वन घटने के कई कारण हो सकते हैं। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्य चल रहे हैं। इसके लिए भी कई बार वनों को काटना पड़ता है। बदले में नए पौधे भी लगाए जाते हैं, मगर उनके फिर से पेड़ बनने में समय लगता है। फिलहाल रिपोर्ट आने पर ही कुछ स्पष्ट होगा।
पर्यावरण संरक्षण के लिए पिछले कुछ वर्षों से सरकार लगातार सघन पौधरोपण अभियान चला रही है। जून-जुलाई के महीने में वन महोत्सव चलाकर पौधे रोपे जा रहे हैं। गत तीन वर्षों में एक करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं। दो वर्षों में इन पौधों को पेड़ बनना था। इसके बावजूद वन क्षेत्र में कमी इस अभियान की उपयोगिता पर सवाल खड़े कर रही है। वनों की सुरक्षा में कार्य करने वाले जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न चिह्न लग रहा है। फिलहाल अधिकारी कारण तलाशने में जुटे हैं।
गत वर्ष कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन के लिए मची मारामारी ने पौधों की उपयोगिता समझाई थी। हर कोई जागरूक होकर पौधे लगाने और पेड़ बचाने का संदेश देता रहा। आसपास का वातावरण हरा-भरा बनाने पर जोर रहा। बड़ी संख्या में लोगों ने खुद से भी पौधे लगाए। इसके बाद भी वनों की संख्या घटती जा रही है।