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गुरु के बताए मार्ग पर चलें

Thu, 26 Nov 2015 11:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, सोनभद्र
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संतोदय सत्संग परिवार का वार्षिक संत समागम बुधवार को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित हुआ। राबर्ट्सगंज स्थित मारवाड़ी धर्मशाला में हुए समारोह की शुरुआत संत सद्गुरु आचार्य प्रेमनाथ सरस्वती स्फोटायन जी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई।
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पूजा-आरती के साथ भजन, कीर्तन और प्रवचन के माध्यम से संत मानस का महत्व समझाया गया। जीवन को सद्गुरु भगवान के बताए मार्ग पर ले जाने का आह्वान किया गया। इस मौके पर सरस्वती देवी ने कहा कि भारत भूमि संतों को जन्म देने वाली है। यहां की संस्कृति को संत सबसे अधिक प्रिय हैं।


संत-संग का नाम ही सत्संग है। डा. सत्येंद्र कुमार पाठक ने कहा कि इस युग की सबसे बड़ी आवश्यकता यह है कि हमारे और हमारी भूमि के संतों के बीच सामंजस्य स्थापित हो। देश में सच्चे संतों का अभाव, देश के प्रति आत्मिक अत्याचार है। ऐसे में इस ओर सबको ध्यान देना चाहिए।
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जिला प्रमुख तारकेश्वर देव पांडेय ने कहा कि जीवन का प्रत्येक क्षण महत्वपूर्ण है। अज्ञान जहां करोड़ों वर्ष तक प्रयत्न करके भी नहीं पहुंच सकता, ज्ञान वहां पल भर में पहुंच जाता है। ज्ञान के समान पवित्र पदार्थ और कोई नहीं है।


ज्ञानोपलब्धि से तत्काल शांति मिलती है। जहां ज्ञान है, वहां शांति है। जहां शांति है, वहां संत हैं। जहां संत हैं, वहां कोई खतरा नहीं है। जो ज्ञान प्राप्त करने में देरी करेंगे, उनके लिए आगे खतरा है।


देर रात तक चले समारोह में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। वहीं भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। समारोह में संतमित्र बावन साव, राममूर्ति यादव, शिवांगी मिश्रा, अनिल मिश्रा, रामचंद्र द्विवेदी, डा. रामनरायन सिंह, केशव सिंह, बेचू प्रसाद, मंगला प्रसाद, वीरेंद्र सिंह, हरिशंकर सिंह, राजेश, उपेंद्र प्रताप सिंह, सतीश सिंह आदि रहे।
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