दो दिवसीय देवगढ़ महोत्सव का शनिवार की रात लोक संगीत के साथ समापन हो गया। इसमें कलाकारों ने लोक संस्कृति से जुडे़ गीत और नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। संगीत के जरिए सामाजिक एकता और समरसता का भी संदेश दिया।
कार्यक्रम की शुरूआत आकाशवाणी कलाकार मुन्नर यादव ने देवी गीत धीरे आइब मइया हमरे दुअरिया प्रस्तुत कर किया। लुप्त हो रही लोक विधा लोरिकी का मंचन करते हुए सस्वर गायन शंकर यादव ने अपनी मंडली के साथ किया।
विनीत यादव ने लाली निराली है जगत में तुम्हारी गीत प्रस्तुत किया। अमरजीत के गीत कंचन कांच कमल कस्तूर भइले विचार बा गीत प्रस्तुत कर लोगों को थिरकने पर विवश कर दिया।
बबलू करंग के नाम से मशहूर लोक गायक मोहम्मद आब्दीन ने भक्ति, श्रृंगार और यथार्थ गीत प्रस्तुत कर लोगों की खूब तालियां बटोरी।
कार्यक्रम में जनजातीय पर्व के तहत आदिवासियों ने भी गीत और नृत्य प्रस्तुत कर कला का शानदार प्रदर्शन किया। कलमकार संघ की ओर से विकास वर्मा, डा. परमेश्वर दयाल श्रीवास्तव एवं अध्यक्ष राम प्रसाद यादव ने आकाशवाणी, दूरदर्शन के गायक कलाकारों को स्मृति चिह्न दिया।
इस मौके पर केपी मौर्य, दयाशंकर रौनियार, विजय अग्रहरि, योगेंद्र कुमार मिश्र, संजय पुरूषार्थी, कृष्ण मोहन, अमित आदि रहे।