फोकट की जमीन पर कई अनजान चेहरे आबाद हैं। ऐसा ही कुछ ऊर्जांचल में चल रहा है। वन रेलवे ग्राम समाज या फिर परियोजनाओं की जमीन पर कब्जा कर ऐसे लोगों ने बस्ती की बस्ती बसा दी। कुछ तो फर्जी आईडी या फिर पते के आधार पर तमाम परियोजनाओं में संविदा कामगार के रूप में काम भी कर रहे हैं। ऐसे में ऊर्जांचल की सुरक्षा में सेंध लगने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
अनपरा में आबाद तमाम बस्तियों को अवैध कहना गलत नहीं होगा। दरअसल अनपरा से निकली रेलवे लाइन के किनारे की जमीन पर अतिक्त्रस्मण किसी से छिपा नहीं है। वन विभाग की भी कई एकड़ जमीन पर ग्राम पंचायतों में अतिक्रमण ने तो विभागीय अधिकारियों के होश उड़ा दिए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि तापीय परियोजना अनपरा की स्थाई कालोनी की जमीन भी अतिक्रमण से बच नहीं सकी है। इसके अलावा इस परियोजना व आवासीय परिसर की सुरक्षा के लिए बनाई गई चहारदीवारी के किनारे स्थाई निर्माण कर व्यवसाय तक चमका दिया। हालत यह है कि आए जमीन कब्जा किए और बस गए लेकिन प्रशासन के नजर में उनकी पहचान छिपी रह गई।
कुछ दिन बाद ऐसे लोग स्थानीय स्तर पर फर्जी आईडी का इंतजाम कर संविदा कामगार के रूप में परियोजनाओं में भी प्रवेश करने लगे। लैंकोए तापीय परियोजना अनपरा, रेणुसागर, एनसीएल की विभिन्न परियोजनाओं में संविदा पर काम करने वाले करीब 20 फीसदी लोगों के स्थाई निवास की जानकारी परियोजनाओं के प्रबंधन तंत्र के पास नहीं है। ऐसे में सुरक्षा के मुद्दे पर इसे एक बड़ा चूक माना जाना गलत नहीं है।
बोले अभियंता
परियोजना की जमीन पर भी अतिक्रमण है। जमीन खाली करने के लिए समय-समय पर जिला प्रशासन को पत्र भेजा जाता है। प्रशासन से मदद भी मिलती है। बेलवादह व पिपरी क्षेत्र के कई विस्थापितों को अभी तक वे जमीन उपलब्ध नहीं करा सके हैंए जिसके कारण वहां परियोजना की जमीन पर अतिक्त्रस्मण है। -
रविशंकर राजीव, अधिशासी अभियंता तापीय परियोजना अनपरा।