जिले में उद्योग को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन कर ओर से पहल तेज कर दी गई है। फ्लाई एश ईंट बनाने के उद्योग स्थापित करने उद्यमियों की हर संभव मदद होगी। परियोजनाओं द्वारा मुफ्त में फ्लाई ऐश मुहैया कराया जाएगा।
जनपद में फ्लाई ऐश ईंट के उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में प्रशासन ने कार्यवाही शुरू कर दी है। जिले में कई तापीय परियोजनाएं हैं। प्रत्येक तापीय परियोजनाओं में कोयले को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। कोयले के इस्तेमाल के बाद दो तरह की राख मिलती है। पहला पलाई ऐश और और दूसरा बॉटम ऐश। फ्लाई ऐश और बॉटम ऐश दोनों का निस्तारण उद्योग को नियत अवधि में किये जाने के निर्देश है। फ्लाई ऐश से सीमेंट एवं फ्लाई ब्रिक्स का उत्पादन किया जाता है। अगर जनपद में फ्लाई ऐश बनाने वाली इकाइयां स्थापित होंगी तो उन्हें फ्लाई ऐश आसानी से उपलब्ध हो जाएगा क्योंकि वर्तमान में राज्य बोर्ड के पास फ्लाई ऐश से ईंट बनाने वाली कोई भी उद्योग पंजीकृत नहीं है। फ्लाई ऐश ब्रिक्स की खड़ंजा, बिल्डिंग ब्लॉक व रोड पेविंग में प्रयुक्त होता है। खपत के सापेक्ष उत्पादन के लिए ब्रिक्स बनाने वाले उद्योगों को बढ़ाया दिया जा सकता है जिससे कि फ्लाई ऐश की निस्तारण और फ्लाई ऐश ब्रिक्स का प्रयोग अधिकाधिक हो सके। एडीएम ने उपायुक्त जिला उद्योग केंद्र को जनपद में स्थापित/संचालित उद्योगों का सर्वे कर सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही ऐसे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए उद्यमियों को प्रोत्साहित करने को कहा है।
तापीय परियोजनाओं के प्रतिनिधियों द्वारा अवगत कराया गया कि पलाई ऐश प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। जो भी उद्यमी फ्लाई ऐश से ईंट बनाने का उद्यम स्थापित करना चाहता है, उन्हें नजदीकी तापीय परियोजना से नि:शुल्क फ्लाई ऐश प्राप्त हो सकेगा। - सहदेव मिश्रा, अपर जिलाधिकारी