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Sonebhadra News: ड्रोन और रोबोट से होगी मछली पालन की निगरानी

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चुर्क। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज सोनभद्र के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रशांत पांडेय के नेतृत्व में प्रस्तावित शोध परियोजना के लिए उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीएसटी-यूपी) ने 16.08 लाख रुपये का अनुसंधान अनुदान स्वीकृत किया है। तीन वर्ष की अवधि वाली परियोजना में उन्नत रोबोटिक्स और ड्रोन तकनीक के माध्यम से बड़े पैमाने पर मत्स्य पालन की निगरानी व्यवस्था विकसित की जाएगी।
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उत्तर प्रदेश में मत्स्य पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मत्स्य पालन के दौरान पानी में घुली ऑक्सीजन, पीएच मान, मटमैलेपन और अमोनिया का स्तर तेजी से बदलता रहता है। पानी की गुणवत्ता में मामूली बदलाव भी मछलियों में तनाव, बीमारी और बड़े पैमाने पर मृत्यु का कारण बन सकता है। इससे मत्स्य पालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। मौजूदा निगरानी व्यवस्था महंगी और श्रमसाध्य होने के साथ पानी की गहराई में प्रदूषण का सटीक आकलन करने में सीमित है। शोध परियोजना के तहत ऐसी अत्याधुनिक प्रणाली विकसित की जा रही है, जो तालाब की सतह से लेकर पानी की विभिन्न गहराइयों तक निगरानी कर सकेगी। परियोजना में सह-अन्वेषक के रूप में आरईसी सोनभद्र के डॉ. आशीष रंजन मिश्रा, आईआईआईटीडीएम कुरनूल के डॉ. विनय कुमार तिवारी और एमएमएमयूटी गोरखपुर के डॉ. रवि प्रकाश त्रिपाठी शामिल हैं। शोध टीम ने इस उपलब्धि के लिए संस्थान के निदेशक प्रो. केएस वर्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष प्रो. डीके त्रिपाठी के प्रति आभार जताया। टीम ने कहा कि उनके निरंतर मार्गदर्शन, प्रशासनिक सहयोग और शोध-अनुकूल वातावरण के कारण परियोजना को यह सफलता मिली है।
तीन चरणों में होगी निगरानी
प्रस्तावित प्रणाली में सबसे पहले हवाई ड्रोन बड़े तालाबों की सतह का त्वरित निरीक्षण करेगा। सतह पर किसी असामान्य बदलाव के संकेत मिलने पर ड्रोन पानी के भीतर चलने वाले छोटे रोबोट को पानी में उतारेगा। सबमर्सिबल रोबोट अलग-अलग गहराइयों पर पानी की स्थिति का अध्ययन कर प्रदूषण के प्रसार का आकलन करेगा। इस प्रणाली की खासियत एफपीजीए आधारित एज-कंप्यूटिंग सिस्टम होगा। इसके माध्यम से रोबोट किसी बाहरी क्लाउड सर्वर पर निर्भर हुए बिना रियल-टाइम में एआई और मशीन लर्निंग मॉडल चला सकेगा। इससे ऊर्जा की खपत कम होगी और रोबोट लंबे समय तक पानी के भीतर काम कर सकेगा।
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