पात्रता निर्धारण में गड़बड़ी का एक और मामला सामने आया है। एक ही आवेदक को तहसील की ओर से पहले पात्र बताते हुए मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का पात्र बताते हुए पांच लाख रुपये देने की संस्तुति की गई तो बाद में दोबारा जांच कर अपात्र बता दिया गया।
एक ही आवेदक की दो रिपोर्ट ने राजस्व विभाग में पात्रता सत्यापन में गड़बड़ी की पोल खोल दी है। बिल्ली मारकुंडी निवासी मनोज पांडेय की मृत्यु 4 दिसंबर 2023 को खदान में काम करते समय गिरने से चोट लगने के कारण हो गई थी।
उनकी पत्नी साधना पांडेय ने एसडीएम ओबरा के यहां पति का मुख्य पेशा कृषि बताते हुए 20 मार्च को मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के अंतर्गत पात्र होने का दावा पेश किया था।
इस दावे को सही पाते हुए तत्कालीन एसडीएम ने 28 मार्च को डीएम को पत्र लिखकर आवेदिका साधना पांडेय को मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के अंतर्गत पांच लाख रुपये की सहायता राशि दिए जाने की संस्तुति की थी।
वहीं 27 अगस्त को डीएम को लिखे गए दूसरे पत्र में एसडीएम ओबरा ने आवेदिका को मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के अंतर्गत अपात्र बताते हुए दावा निरस्त करने की संस्तुति कर दी। एक ही व्यक्ति के बारे में दो तरह की रिपोर्ट से चर्चाएं जोरों पर हैं।
एसडीएम ओबरा विवेक कुमार सिंह ने बताया कि दावे की पुनः जांच में पात्रता के लिए आवेदक जरूरी साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रही। इस कारण उसे अपात्र ठहराया। वैसे इस मामले आवेदक 20 लाख रुपये की सहयोग राशि पहले प्राप्त कर चुकी हैं।