सोनभद्र। आग लगने की आए दिन हो रही घटनाओं के बावजूद जिले के जिम्मेदारों ने सबक नहीं लिया है। सरकारी कार्यालयों में आग से बचाव के समुचित इंतजाम नहीं हो पाए हैं। ज्यादातर जगहों पर सुरक्षा के लिहाज से सिर्फ फायर एक्सटिंग्यूशर लगाए गए हैं, मगर उनकी महीनों से जांच नहीं हुई है। हाल यह है कि उपयोग की अवधि खत्म होने के बाद भी एक्सटिंग्यूशर बदले नहीं गए हैं। कलेक्ट्रेट और विकास भवन जैसे प्रमुख कार्यालय भी इसमें शामिल हैं। महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों के आसपास विद्युत तारों के जंजाल के बीच ऐसी लापरवाही बरती जा रही है।
पिछले दिनों रॉबर्ट्सगंज तहसील परिसर में आग लगी थी। भवन के दूसरी मंजिल की छत पर कई कागजात जल गए थे। हालांकि जांच के बाद दावा किया गया कि यह कागजात पुराने और अनुपयोगी थे। इससे पहले सीएमओ कार्यालय, ड्रग वेयर हाउस, घोरावल सीएचसी सहित कई अन्य स्थानों पर आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। इन घटनाओं में संबंधित विभाग को लाखों का नुकसान भी हुआ है। आग से सुरक्षा के मद्देनजर ही सभी कार्यालयों व विभागों में अग्निशमन के इंतजाम मुकम्मल रखने के निर्देश दिए गए हैं। बावजूद जिले के तमाम सरकारी कार्यालयों में इसकी अनदेखी हो रही है। महत्वपूर्ण दस्तावेजों के आसपास बिजली के तारों का जंजाल है। आग लगने के कई अन्य संभावित खतरे भी हैं। फिर भी बचाव इंतजामों में लापरवाही बरती जा रही है। इसमें कलेक्ट्रेट और विकास भवन जैसे प्रमुख कार्यालय भी हैं। कलेक्ट्रेट में डीएम कक्ष से सभागार को जाने वाले मार्ग पर वाटर कूलर के पास लगे दोनों संयंत्र की वैधता खत्म हो चुकी है। भवन में लगे फायर अलार्म सहित अन्य संसाधन भी क्रियाशील नहीं हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति विकास भवन की भी है। निचले दल पर समाज कल्याण विभाग और जिला विकास अधिकारी कार्यालय के पास आग से बचाव के लिए लगे अग्निशमन यंत्र को महीनों बाद भी रिफिल नहीं कराया गया है। दूसरी मंजिल पर लगे यंत्रों की भी यही दशा है। पिछले दिनों हुई घटना के बाद भी तहसील परिसर में सिर्फ एक अग्निशमन यंत्र लगा है, जबकि यहां जगह-जगह पुराने तार उलझे हुए हैं। नगर पालिका कार्यालय में आग से बचाव की कोई सुविधा ही नहीं है। यहां अग्निशमन यंत्र भी नदारद है। इन स्थानाें पर हर रोज बड़ी संख्या में लोग आते हैं और इलेक्ट्रानिक उपकरण भी रखे गए हैं।
बिना एनओसी ही चल रहे अस्पताल
पिछले दिनों लखनऊ के एक अस्पताल और उससे पहले अन्य जिलों में आग लगने की घटनाओं के बाद शासन के निर्देश पर अग्निशमन विभाग ने जांच की थी। इसमें ज्यादातर अस्पतालों में जरूरी इंतजाम नदारद मिले थे। यहां तक कि मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल, एल-2 अस्पताल में भी खामियां पाई गई थीं। डिबुलगंज संयुक्त अस्पताल, दुद्धी, घोरावल सीएचसी सहित अन्य अस्पतालों की जांच में मिली कमियों को दूर कराने के निर्देश दिए गए थे। ज्यादातर जगहों पर अग्निशमन को लेकर स्थिति जस की तस है।
ये संसाधन होने चाहिए
किसी भी व्यावसायिक भवन या कार्यालय में आग से बचाव के लिए कम से कम दस हजार लीटर की पानी टंकी होनी चाहिए। इसके अलावा 450 लीटर प्रति मिनट क्षमता का पंप, फायर अलार्म, रिकॉर्ड रूम में स्मोक डिटेक्टर, फायर एक्सटिंग्यूशर, हौज रिल, डाउनकमर होना जरूरी है। जिले के ज्यादातर कार्यालयों में सिर्फ एक्सटिंग्यूशर ही लगे हैं।
सभी सरकारी कार्यालयों व महत्वपूर्ण भवनों में अग्निसुरक्षा को लेकर उपलब्ध सुविधाओं की जांच के लिए अग्निशमन विभाग को निर्देश दिए गए हैं। उनकी रिपोर्ट में जो भी कमियां या सुझाव होंगे, उस पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। -बद्रीनाथ सिंह, डीएम।
जिलाधिकारी के निर्देश पर सरकारी कार्यालयों में फायर ऑडिट की जा रही है। अभी जांच चल रही है। इसकी पूरी रिपोर्ट बनाकर डीएम को सौंपी जाएगी। -करन सिंह यादव, प्रभारी अग्निशमन अधिकारी।