शक्तिनगर। मिनी रत्न कंपनी नार्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) के खड़िया कोयला क्षेत्र के कोल यार्ड में आग लगने से प्रबंधन में खलबली मच गई। कोल हैंडलिंग प्लांट (सीएचपी) के पास स्थित जिस भंडार में आग लगी है उस जगह कई लाख टन कोयला है। प्रयास किया जा रहा है कि आग बुझाने के साथ कोल स्टॉक को जल्द खाली करा लिया जाए ताकि क्षति कम हो सके।
कर्मचारियों ने बताया कि भंडार में आग कई दिनों से सुलग रही थी इसे बुझाने के प्रयास के साथ कोयला हटाने का काम शुरू कर दिया गया था। इसी बीच मंगलवार सुबह अचानक आग का दायरा बढ़ गया और भंडार के बड़े हिस्से में फैल गई। इस मामले में प्रबंधकीय लापरवाही की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि समय से प्रबंधन कोल भंडार के रखाव को लेकर इंतजाम नहीं किया किया। इसके चलते कई सौ टन कोयला राख में तब्दील में हो गया।
कोल कर्मचारियों ने बताया कि कायदे से खदान से निकलने वाले कोयले को बड़ी मशीनों से दबाया जाता है ताकि उसे ऑक्सीजन नहीं मिल सके। लेकिन यहां रखाव को लेकर ऐसा नहीं किया गया और हवा का साथ मिलने से भंडार में आग का दायरा बढ़ गया।
आग बुझाने के साथ ही भंडार से कोयला उठाया जा रहा है। मौसम की वजह से ऐसी स्थिति बनती है लेकिन इसे नियंत्रित कर लिया जाएगा।
दिनेश चंद्र मिश्रा, डिस्पैच मैनेजर, एनसीएल खड़िया क्षेत्र।
एनसीएल में आग की तीसरी घटना
शक्तिनगर। एनसीएल की कोयला परियोजनाओं में बनाए गए अस्थायी कोल भंडारों में आग लगने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसके पीछे के कारण जो भी हो लेकिन इससे कंपनी को बड़ी क्षति पहुंच रही है। इससे पहले एनसीएल बीना के पूर्वी कोल भंडार व एनसीएल दुद्धीचुआ के सीएचपी के पास स्थित कोल स्टॉक में आग लग चुकी है। दस दिन से अधिक बीतने के बाद भी प्रबंधन आग पर पूरी तरह काबू नहीं पा सका है।