दोनों नाना-नानी के संरक्षण में पल रहे थे। तभी ईश्वर ने मां को छीन लिया। फिर दोनों बच्चों को नाना-नानी संभाल रहे थे। लेकिन कुछ माह बाद नाना की भी असमय मौत हो गई। अब बची नानी। नानी दो बच्चों को पालने की हिम्मत नहीं जुटा पाईं तो पुत्र को 10 हजार रुपये में गांव के ही एक व्यक्ति को बेच दिया। बालिका को वह पाल रही थीं, तभी इस वर्ष कोरोना ने नानी का भी साया उठा लिया।
जब धरसड़ी गांव में दोनों अनाथ बच्चों को लेने के लिए बाल कल्याण समिति के लोग पहुंचे तो सात वर्षीय बालिका और चार वर्षीय बालक को बुलाया गया। बालक कुछ नहीं बता पाया, लेकिन बालिका ने अपनी नानी से सुनी हर बात बता डाली।
कहने लगी नानी की मौत के बाद वह गांव के ही एक व्यक्ति के यहां खाना खाती है। कभी-कभी गांव के अन्य लोग भी खिला देते हैं। भाई को जानती तो है, लेकिन वह दूसरे के यहां रहता है, उसकी परवरिश होती है इस लिए उसे परेशान नहीं करने जाती।
जिला प्रोबेशन अधिकारी डॉ. अमरेंद्र पौत्स्यायन ने कहा कि दोनों अनाथ बच्चों को अब प्रशासन संरक्षण देगा। टीम वहां से दोनों बच्चों को लेकर आ रही है। यहां नियमानुसार उन्हें बालगृह बालक और बालिका में रखा जाएगा। दोनों को बेहतर परवरिश दी जाएगी।