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Sonebhadra News: खानपान की कमी से छोटी उम्र में कम हो रही आंखों की रोशनी

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जिले में आंखों की देखभाल में लापरवाही और खान पान में पौष्टिक आहारों की कमी के कारण कम उम्र में ही बच्चों और युवाओं के आंखों की रोशनी कम हो रही है। बच्चों में बढ़ती इस समस्या के पीछे मोबाइल के अधिक उपयोग को भी कारण बताया जा रहा है।
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जिला अस्पताल में नेत्र विभाग के ओपीडी की बात करें तो यहां औसतन रोजाना 50 मरीज आ रहे हैं। इनमें करीब 8 से 10 बच्चे होते हैं, जबकि 18 से 22 संख्या युवाओं की हाेती है। इससे कई गुना मरीज निजी चिकित्सालय में पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के आंखों की जांच में चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है। आठ से 12 आयु वर्ग के बच्चों के आंखों की रोशनी तेजी से कम हो चुकी है। पिछले छह महीने में टीम ने चार ब्लॉकों के स्कूलों में 450 के करीब ऐसे बच्चों को चिन्हित किया है, जिनके आंखों की रोशनी प्रभावित हुई है। उन्हें विभाग से चश्मा दिया जाएगा।
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आरबीएसके कार्यक्रम भगवान भरोसेआरबीएसके की टीम को जिले के स्कूलों में जाकर बच्चों में बीमारियों का पता लगाना होता है। इसमें आंखों की जांच भी होती है। टीम में घोरावल, दुद्धी, चतरा, चोपन में विकास खंड में ही नेत्ररोग की जांच और पहचान के चिकित्सक हैं। अन्य ब्लॉकों में इस कार्यक्रम का संचालन नहीं हो रहा है।
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बच्चे और युवा प्रभावित
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. वीके श्रीवास्तव की मानें तो 8 से 12 आयु वर्ग के बच्चों में आंखों की रोशनी काफी तेजी से कम हो रही है। इन्हें चश्मा लगाने की सलाह दी जा रही है। बीते दो वर्षों की तुलना में यह संख्या बढ़ी है। ऐसे में अभिभावकों को ध्यान देना चाहिए कि बच्चे में विटामिन ए की कमी न होने पाए। देहात इलाकों में यह माना जाता था कि बच्चे ताजे फलों और हरी सब्जियों का सेवन करते हैं जिसकी वजह से उनकी आंखें ठीक होती हैं, लेकिन जांच के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, उसके अनुसार खानपान में कमी इसके लिए जिम्मेदार है।

इन बातों का रखें ध्यान
नेत्र रोग विशेषज्ञ गोविंद यादव ने बताया कि आज के समय ज्यादातर लोग घंटों कंप्यूटर स्क्रिन के सामने काम करते हुए बिताते हैं या फिर फोन चलाते हुए। कंप्यूटर स्क्रिन और मोबाइल स्क्रिन से निकलने वाली किरणें आंखों पर बुरा असर डालती हैं। इसके अलावा बदलती हुई जीवनशैली से भी आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। आंखों की रोशनी को सही रखने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि अपनी खान-पान की आदतों में सुधार किया जाए। आंखों की रोशनी को सही रखने के लिए पोषक तत्वों और विटामिन से भरपूर आहार लें।
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इन बातों का रखें ध्यान
- आंखों को दिन में दो बार ठंडे पानी से जरूर धोएं।
- पढ़ते समय रोशनी का खास ध्यान रखना चाहिए।
- बहुत हल्की रोशनी में पढ़ने से आंखों पर दबाव पड़ता है।
- धूल, प्रदूषण से आंखों को बचाएं।
- बहुत देर तक लगातार पढ़ने या कंप्यूटर पर काम करने के कारण आंखों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कुछ देर के अंतराल में आंखों को बंद कर आराम दें।

केस:1
शाहगंज निवासी सूरज 9 को आंखों से लगातार पानी आने और धुंधला दिखने की शिकायत थी। जांच के बाद उसे चश्मा लगाना पड़ा।

केस:2
पगिया निवासी रोहन 11 को सिर में दर्द और धुंधला दिखने की समस्या थी। जहां चिकित्सकों ने बीटामीन ए के सेवन पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा।
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