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अब हर मकान और जमीन का होगा विशेष नंबर

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सोनभद्र। जमीन संबंधी विवादों को कम करने के लिए प्रदेश सरकार ने हर घर और जमीन को विशेष पहचान देने की तैयारी शुरू कर दी है। स्वामित्व योजना के तहत हर मकान और जमीन का विशेष नंबर होगा। आबादी की जमीन पर मकान बना कर रह रहे लोगों को घरौनी खतौनी दी जाएगी। इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए हर घर व जमीन का सर्वे की तैयारी तेज कर दी गई। पायलट प्रोजेक्ट में 11 गांव लिए गए थे। इन गांवों का सर्वे का कार्य पूर्ण कर प्रकाशन करने की कार्यवाही की जा रही है।
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अधिकांश विवाद जमीन संबंधी मामलों को लेकर होते रहे हैं। जमीन संबंधी विवादों को कम करने के लिए सभी भवनों व जमीन को विशेष नंबर देकर पहचान देने की तैयारी है। इसके लिए स्वामित्व योजना की शुरूआत की गई है। इसके तहत हर मकान और जमीन के विशेष नंबर होंगे। साथ ही भवनों पर उसके मालिक के नाम भी दर्ज होंगे। स्वामित्व योजना के तहत आबादी की भूमि पर मकान बनाकर रह रहे लोगों को खतौनी की तर्ज पर घरौनी दी जाएगी। इससे मकान व जमीन पर स्वामित्व को लेकर होने वाले विवाद काफी हद तक कम हो जाएंगे। गांवों में रहने वाले लोगों को मकान और जमीन का प्रमाणित दस्तावेज मिलने के बाद बैंकों से कर्ज आदि लेने के लिए भी आवेदन कर सकते हैं। जिला प्रशासन की ओर से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में राबर्ट्सगंज, दुद्वी और घोरावल तहसील के 11 गांव लिए गए थे। इन सभी गांवों में सर्वे का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। जिन गांवों का सर्वे हो चुका है, संबंधित एसडीएम ने उनकी रिपोर्ट एडीएम को भेज दी है।
कोट
सभी एसडीएम को जमीन व भवनों का सर्वे कराने का निर्देश दिया गया है ताकि योजना को अमलीजामा पहनाया जा सके। जिन गांवों का सर्वे का कार्य पूर्ण होगा उसका प्रकाशन कराया जाएगा। प्रकाशन के बाद अगर कोई व्यक्ति शिकायत करता है कि उसका नाम छूट गया है या तो सर्वे गलत ढंग से हुआ है तो जांच कराई जाएगी। आबादी की जमीन पर रह रहे सभी लोगों को खतौनी की तर्ज पर घरौनी उपलब्ध कराई जाएगी।- योगेंद्र बहादुर सिंह, अपर जिलाधिकारी
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इनसेट
सर्वे के लिए नामित है एजेंसी
सोनभद्र। ग्रामीण इलाकों में आबादी की जमीन पर रह रहे लोगों को मालिकाना हक देने की पहल तेज कर दी गई है। शासन स्तर से गांवों का सर्वे करने के लिए एक एजेंसी नामित की गई है। एजेंसी से जुड़े लोग लेखपालों की सहयोग से ड्रोन कैमरे से सर्वे का कार्य कर रहे हैं। अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह का कहना है कि सर्वे कार्य के लिए नामित एजेेंसी के कार्यों की भी मानीटरिंग कराई जा रही है ताकि पात्र किसी भी व्यक्ति का नाम घरौनी में शामिल होने से न छूट जाएं।
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