करमा थाना क्षेत्र के सरंगा गांव में 25 जनवरी की देर शाम धारदार हथियार से वार कर बाइक सवार रामनरेश की हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड की गुत्थी पुलिस अब तक नहीं सुलझा सकी है। पुलिस की चार टीमें अब तक सिर्फ हवा में ही हाथ-पैर मार रही हैं।
सरंगा निवासी रामनरेश यादव (50) खेती के साथ ही दूध का कारोबार करते थे। 25 जनवरी की शाम वह किसी काम से करमा बाजार गए थे। देर रात करीब नौ बजे घर लौटने के दौरान गांव के बाहर बदमाशों ने धारदार हथियार से उनपर हमला कर दिया।
मौके पर ही उनकी मौत हो गई। मार्ग से गुजर रहे राहगीरों ने सड़क पर शव देख पुलिस को सूचना दी। सीओ, एएसपी सहित अन्य अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। मौके पर फील्ड यूनिट, एसओजी, सर्विलांस और फोरेंसिक की टीमों ने भी पहुंचकर साक्ष्य भी जुटाए हैं।
अपराधियों ने घटना को मृतक के घर से तीन सौ मीटर दूर अंजाम दिया था। घटना से कुछ दूरी पर ही उसकी बाइक बरामद हुई है। मामले में पुलिस के उच्चाधिकारियों की ओर से खुलासे के लिए चार टीमों का गठन किया गया था।
घटना के करीब 40 दिन के बाद भी न तो यह टीमें बदमाशों को पकड़ पाई है और न ही पुलिस को कोई सुराग मिला है। इससे पुलिस की कार्यशैली पर लोग सवाल उठा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की शिथिलता से अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं, वहीं, पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
पहले महाकुंभ का था बहाना
चर्चित हत्याकांड का खुलासा ने होने के पीछ़े पूर्व में यह दलील दी जा रही थी कि काफी संख्या में अधिकारी और पुलिस कर्मी महाकुंभ में गए हैं। कुंभ खत्म हो चुका है, मगर हत्या का खुलासा नहीं हो सका है। घोरावल सर्किल के इस थाने में हत्या की जांच सुस्त होने से आरोपियों को लाभ मिल रहा है।
मामले में सभी टीमें तत्परता से कार्रवाई कर रही हैं। कुछ सुराग भी मिले हैं। जल्द ही घटना का खुलासा कर दिया जाएगा।
-कालू सिंह,एएसपी।