बेतहाशा उमस व तपिश के कारण बुधवार को प्रदेश में बिजली की मांग वर्तमान सत्र के शीर्ष स्तर पर पहुंच गई। इस दौरान अधिकतम मांग 26 हजार मेगावाट पार कर जाने से तमाम कवायदों के बाद भी सुचारु विद्युत आपूर्ति करना पावर कारपोरेशन के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
इस वर्ष मार्च से ही गर्मी ने रौद्र रुख अख्तियार कर लिया है। इसका प्रभाव बिजली की मांग पर भी देखा जा रहा है। प्रचंड गर्मी के कारण इस वर्ष 15 मई को ही बिजली की मांग रिकार्ड 25435 मेगावाट पहुंच गई थी। उसके बाद पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण आंधी-पानी का दौर शुरू हो जाने से बिजली की मांग में उत्तरोत्तर गिरावट आनी शुरू हो गई थी। मई के उत्तरार्द्ध में तो मांग गिरकर 20 हजार मेगावाट से भी नीचे आ गई थी मगर जून की शुरुआत से ही मौसम ने पलटा खाया और एक बार फिर से गर्मी अपने रौ में आ गई। भारी तपिश के साथ बेतहाशा उमस से तापमान बढ़ने के साथ ही बिजली की मांग में भी उछाल आनी शुरू हो गई। दो दिन तक 25 हजार मेगावाट पार करने के बाद बुधवार सुबह तक बिजली की अधिकतम मांग रिकार्ड 26192 मेगावाट पहुंच गया। मांग में वृद्धि के कारण पावर कारपोरेशन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आवश्यक इंतजाम के बाद भी प्रदेश के कई इलाकों में आपात कटौती करनी पड़ रही है।
लैंको का बढ़ाया गया लोड
बिजली की मांग में भारी वृद्धि को देखते हुए गंभीर कोयला संकट का सामना कर रही लैंको परियोजना की इकाइयों का भी लोड बढ़ा दिया गया है। अभी तक लगातार 700 मेगावाट के आसपास उत्पादन कर रही परियोजना से बुधवार को 900 मेगावाट के करीब विद्युत उत्पादन किया जा रहा था। हालांकि कोयले की कमी के कारण लैंको अब भी स्थापित क्षमता 1200 मेगावाट से दूर है। वहीं निगम की सभी इकाईयां पूर्व की तरह फुल लोड पर चलाई जा रही हैं।