दुद्धी। दो कमरे, आठ कक्षाएं और 162 बच्चे। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां पढ़ाई कैसे हाेती होगी। पुनर्वास कॉलोनी अमवार के कंपोजिट विद्यालय में महीनों से बच्चे इसी व्यवस्था में पढ़ रहे हैं। संसाधनों के आगे बेबस शिक्षक किसी तरह शिफ्टों में पढ़ाई कराने में लगे हैं।
अमवार में कनहर बांध के निर्माण के बाद दुद्धी और बभनी के 11 गांव के लोगों को विस्थापित कर पुनर्वास कॉलाेनी में बसाया गया है। उनके बच्चों की अच्छी शिक्षा-दीक्षा के लिए यहां पहले से कंपोजिट विद्यालय संचालित था। डूब क्षेत्र के रहवासियों के कॉलोनी में आने के बाद बच्चों का नामांकन बढ़ गया है। पुराने जर्जर भवन को ध्वस्त किए जाने के बाद विद्यालय संचालन के लिए यहां सिर्फ दो कमरे हैं। इसके अलावा एक रसोई घर है।
इन्हीं दो कमरों में शिफ्टवार अलग अलग कक्षा के बच्चों को पढ़ाई कराई जा रही है। कई बार ऐसी स्थिति ऐसी आती है कि एक कक्षा चलती है तो दूसरी कक्षा के बच्चे बाहर खेलने जाते हैं। ज्यादा भीड़ होने की वजह से बच्चों को चटाई पर बैठा कर पढ़ाई कराई जा रही है। कार्यालय कक्ष में 20 बच्चों की पढ़ाने की व्यवस्था की गई है।
प्रभारी प्रधानाचार्य नीरज चतुर्वेदी ने कहा कि विद्यालय के पुराने भवन को गिराने के बाद दो कमरे में कुल 162 बच्चों की पढ़ाई अलग-अलग शिफ्ट में कराई जाती है। नए भवन के लिए पत्र भेजा गया है। पहले इस काॅलोनी में कोई खास भीड़ नहीं थी, लेकिन सभी विस्थापित के बसने से बच्चों की संख्या बढ़ी है।
दो शिक्षामित्रों समेत चार तैनात
इस विद्यालय में प्राथमिक के अध्यापक भी नहीं है। प्रभारी प्रधानाचार्य नीरज चतुर्वेदी, सहायक शताक्षी गोहरे, शिक्षा मित्र सतीश कुमार चंचल, जीत सिंह के सहारे ही पठन-पाठन चल रहा है।
कंपोजिट विद्यालय अमवार पुनर्वास काॅलोनी में नए चार कमरे के भवन निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति भी हो चुकी है। जल्द ही निर्माण कार्य कराया जाएगा। - महेंद्र मौर्य, बीईओ दुद्धी।