गुप्त काशी के रूप में विख्यात शिवद्वार से सटे देवगढ़ गांव में देवगढ़ महोत्सव का उद्घाटन शुक्रवार की दोपहर में हुआ। इस मौके पर राज्यपाल रामनाईक ने कई विभूतियों को विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रभाश्री सम्मान से सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि वे क्षेत्र का विकास और पर्यटन स्थल बनवाने का प्रयास करेंगे।
उद्घाटन सत्र की शुरुआत मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रामनाईक और अध्यक्षता कर रहे सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति गिरधर मालवीय ने की। विभा सिंह ने सरस्वती वंदना और कवि रमाशंकर विकल ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
राज्यपाल ने कहा कि देवगढ़ ऐतिहासिक स्थल है। हिंदुस्तान में ऐतिहासिकता के नजरिए से कई उपेक्षित स्थान हैं, जिनमें से एक सोनभद्र भी है। विद्वानों को देवगढ़ का पूरा इतिहास अच्छी तरह से प्रकाशित करना चाहिए।
उसके प्रकाशन की उन्होंने खुद जिम्मेदारी ली। कहा कि वे देवगढ़ के विकास के लिए प्रयास करेंगे। पर्यटन के क्षेत्र में विकास के लिए वे शासन के अधिकारियों और मंत्रियों के सामने यहां की समस्या रखेंगे।
राज्यपाल ने जाति और धर्म की राजनीति पर भी कटाक्ष किया। कहा कि सभी को मानव धर्म का पालन करना चाहिए। कर्तव्य का पालन ही धर्म है।
भगवान श्रीराम ने कर्तव्य का पालन किया और इसीलिए आज भी उनकी प्रासंगिकता है। भारतीय संस्कृति अनेकता में एकता की है। यहां गंगा-जमुनी तहजीब है।
सभी लोग कर्तव्य का धर्म निभाएं तो समस्याएं खुद हल हो जाएंगी। कहा कि हीरा कोयले की खदान में मिलता है। उसमें जाने में हाथ काले हो जाते हैं मगर मगर उन्हें यहां हीरे ही हीरे मिले हैं।
इसके पूर्व कार्यक्रम के प्रधान संयोजक यूपी सरकार के पूर्व मंत्री सरजीत सिंह डंग ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने सोनभद्र के पिछड़ेपन पर चर्चा की और देवगढ़, शिवद्वार समेत जिले के विभिन्न क्षेत्रों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग राज्यपाल से की।
कार्यक्रम के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति गिरधर मालवीय ने राज्यपाल को इस पिछड़े क्षेत्र में समय देने के लिए धन्यवाद दिया। कार्यक्रम के सह संयोजक जितेंद्र सिंह संजय ने संचालक की भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक तीरथराज, ब्लाक प्रमुख मधुसुदन सिंह, राजबहादुर सिंह, श्रवण जी, कृष्ण मुरारी गुप्ता, संदीप सिंह चंदेल, लालजी तिवारी, माला चौबे, राजकुमार चौबे, हिमांशु कुमार सिंह, गणेश देव पांडेय आदि रहे।